Chief: Rajesh Patel (Aapka news Star)
मध्य प्रदेश: 12 मार्च 2026
पत्रकार: राजकुमार प्रजापति (अजयगढ़)
अजयगढ़ की अनोखी शादी: बैलगाड़ियों से निकली बारात, परंपरा की झलक ने जीता लोगों का दिल।
अजयगढ़ की अनोखी शादी: बैलगाड़ियों से निकली बारात, परंपरा की झलक ने जीता लोगों का दिल।
अजयगढ़ ब्यूरो.पन्ना। आज के दौर में जहां शादी-विवाह में आधुनिकता, महंगी गाड़ियां और चमक-दमक का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं अजयगढ़ में एक ऐसी अनोखी शादी देखने को मिली जिसने पुरानी परंपराओं की याद ताज़ा कर दी।
अजयगढ़ के प्रसिद्ध डॉ. रामखिलावन विश्वकर्मा ने अपने छोटे बेटे की शादी में आधुनिकता की दौड़ से अलग हटकर पुरानी परंपरा को अपनाया और बारात को बैलगाड़ियों से निकालने का निर्णय लिया। इस अनोखी पहल के लिए अजयगढ़ जनपद के लगभग आधा दर्जन गांवों से बैलगाड़ियां मंगाई गईं।
बारात के दौरान बैलों के गले में बंधी घंटियों की मधुर आवाज रात के शांत माहौल में एक अलग ही वातावरण बना रही थी। यह दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया और बड़ी संख्या में लोग इस पारंपरिक बारात को देखने के लिए जुटे।
जानकारी के अनुसार बारात में अजयगढ़ क्षेत्र के बीरा, लोलास,शाहपुरा,गड़रियन पुरवा,मझपुरवा सहित कई गांवों से लगभग 30 बैलगाड़ियों को शामिल किया गया।बारात के दौरान लगभग आधा दर्जन घोड़े भी ढ़ोल के साथ नृत्य करते दिखे।
इस अनोखी बारात के बारे में बताते हुए डॉ. विश्वकर्मा ने कहा कि आजकल लोग महंगी-महंगी गाड़ियों और यहां तक कि हेलीकॉप्टर से भी बारात निकालते हैं, जिससे हम अपनी पुरानी परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने पारंपरिक तरीके से बारात निकालने का निर्णय लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में विश्व के कई देशों में चल रहे युद्ध और पेट्रोलियम पदार्थों की संभावित कमी को देखते हुए भी यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि हमारी पुरानी परंपराएं न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हैं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।
यह अनोखी बारात पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों ने इस पहल की सराहना की है।
अजयगढ़:- आज के दौर में जहां शादी-विवाह में आधुनिकता, महंगी गाड़ियां और चमक-दमक का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं अजयगढ़ में एक ऐसी अनोखी शादी देखने को मिली जिसने पुरानी परंपराओं की याद ताज़ा कर दी।
अजयगढ़ के प्रसिद्ध डॉ. रामखिलावन विश्वकर्मा ने अपने छोटे बेटे की शादी में आधुनिकता की दौड़ से अलग हटकर पुरानी परंपरा को अपनाया और बारात को बैलगाड़ियों से निकालने का निर्णय लिया। इस अनोखी पहल के लिए अजयगढ़ जनपद के लगभग आधा दर्जन गांवों से बैलगाड़ियां मंगाई गईं।
बारात के दौरान बैलों के गले में बंधी घंटियों की मधुर आवाज रात के शांत माहौल में एक अलग ही वातावरण बना रही थी। यह दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया और बड़ी संख्या में लोग इस पारंपरिक बारात को देखने के लिए जुटे।
जानकारी के अनुसार बारात में अजयगढ़ क्षेत्र के बीरा, लोलास,शाहपुरा,गड़रियन पुरवा,मझपुरवा सहित कई गांवों से लगभग 30 बैलगाड़ियों को शामिल किया गया।बारात के दौरान लगभग आधा दर्जन घोड़े भी ढ़ोल के साथ नृत्य करते दिखे।
इस अनोखी बारात के बारे में बताते हुए डॉ. विश्वकर्मा ने कहा कि आजकल लोग महंगी-महंगी गाड़ियों और यहां तक कि हेलीकॉप्टर से भी बारात निकालते हैं, जिससे हम अपनी पुरानी परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने पारंपरिक तरीके से बारात निकालने का निर्णय लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में विश्व के कई देशों में चल रहे युद्ध और पेट्रोलियम पदार्थों की संभावित कमी को देखते हुए भी यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि हमारी पुरानी परंपराएं न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हैं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।
यह अनोखी बारात पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों ने इस पहल की सराहना की है।
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