Chief: Rajesh Patel (Aapka news Star)
मध्य प्रदेश: 27 मई 2026
पत्रकार: राजकुमार प्रजापति (अजयगढ़)
अजयगढ़: नयापुरवा हादसे पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने सौंपा ज्ञापन, गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग
5 मजदूरों की मौत पर फोरेंसिक ऑडिट, अधिकारियों को हटाने व 50-50 लाख मुआवजे की मांग
अजयगढ़ ब्यूरो.पन्ना। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनीश खान ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर नयापुरवा में 26 मई 2026 को मनरेगा के निर्माणाधीन कुएं के ढहने से 5 मजदूरों की दर्दनाक मौत को 'दिल दहला देने वाली दुखद घटना' बताया। ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाते हुए ठोस कार्रवाई की मांग की गई है।
ज्ञापन में लगाए गए गंभीर आरोप:
1. खतरनाक निर्माण: परियोजना 2024-25 में ₹6,75,000 स्वीकृत थे। मिट्टी रेतिली और अस्थिर होने के बावजूद सुरक्षा व इंजीनियरिंग उपायों के बिना निर्माण कराया गया।
2. फर्जीवाड़े की आशंका: मनरेगा मजदूरी मद से मास्टररोल पर ₹1,96,000 से अधिक भुगतान दिख रहा है, लेकिन सामग्री और बिलों का भौतिक सत्यापन संदिग्ध व कथित तौर पर फर्जी है।
3. हाजिरी में गड़बड़ी: हादसे के समय 5-7 मजदूर मौजूद थे, पर उनके नाम पोर्टल/हाजिरी में दर्ज नहीं। पारदर्शिता की गंभीर कमी।
4. रेस्क्यू में देरी: करीब 3 घंटे की अनावश्यक देरी हुई, जिससे पांचों मजदूरों को बचाया नहीं जा सका।
शहीद मजदूरों के नाम:
राजकुमार यादव पिता छोटू यादव उम्र 50 वर्ष, आशीष यादव पिता मुन्नी यादव उम्र 40 वर्ष, चुन्नू यादव पिता सिद्धू यादव उम्र 60 वर्ष, रामपाल पिता गोरा यादव उम्र 45 वर्ष, चुनवा पाल पिता दाऊ पाल उम्र 45 वर्ष। सभी निवासी नयापुरवा, ग्राम बीहरपुरवा, तहसील अजयगढ़, जिला पन्ना।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें:
1. FIR दर्ज हो: निर्माण एजेंसी पर भारतीय न्याय संहिता BNS के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए।
2. अधिकारियों पर कार्रवाई: जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं कलेक्टर पन्ना ऊषा परमार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमराव सिंह मरावी को तुरंत हटाया जाए। जनपद CEO अजयगढ़ सतीश सिंह नागवंशी को निलंबित किया जाए।
3. न्यायिक जांच: जज/सेवानिवृत्त जज, वरिष्ठ प्रशासनिक व आईपीएस अधिकारी सम्मिलित कर उच्चस्तरीय, निष्पक्ष न्यायिक जांच करवाई जाए।
4. फोरेंसिक ऑडिट: मनरेगा के सभी रिकॉर्ड- भुगतान वाउचर, मास्टररोल, हाजिरी व डिमांड रजिस्टर, बिल व सत्यापन का फोरेंसिक ऑडिट कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
5. रेस्क्यू में लापरवाही की जांच: देरी के कारणों की स्वतंत्र जांच हो और लापरवाही साबित होने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
6. मुआवजा व नौकरी: मृतक परिवारों को तत्काल 50-50 लाख रुपये आर्थिक सहायता, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और बच्चों के लिए छात्रवृत्ति/शैक्षिक मदद सुनिश्चित की जाए।
भविष्य के लिए सुझाव:
मनरेगा परियोजनाओं में कड़े सुरक्षा मानक लागू हों, पारदर्शी रिकॉर्ड-कीपिंग अनिवार्य हो और त्वरित निगरानी सिस्टम बनाया जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि पीड़ित परिवारों को न्याय तथा जवाबदेही चाहिए।
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