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अजयगढ़ पन्ना: अजयगढ़ नगर में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक किले में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर अपार श्रद्धालुओं ने जाकर अजयपाल महराज भगवान के दर्शन किए।

Editor in Chief: Rajesh Patel (Aapka news Star) 

मध्य प्रदेश: जनवरी 142026

पत्रकार: राजकुमार प्रजापति (अजयगढ़)

अजयगढ़ नगर में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक किले में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर अपार श्रद्धालु पधारे मकर संक्रांति के पावन पर्व पर भगवान अजय पाल जी की प्राचीन प्रतिमा के दर्शन करके शुद्ध घी का सवा किलो का रोड और उसी का हलवा बनाकर के भगवान अजय पाल बाबा को प्रसाद अर्पित करते हैं।

अजयगढ़ ब्यूरो.पन्ना। यह हजारों साल की परंपरा है जो आज भी लोग जारी किए हुए हैं भगवान अजय पाल बाबा पर अपार श्रद्धा क्षेत्र वासियों को है ग्रामीण जन जन लमटेरा गाते हुए अजय पाल भगवान के दर्शन करने के लिए में जाते हैं और वहीं सरोवर में स्नान करके प्रसाद अर्पित करते थे भगवान अजय पाल बाबा किले के प्रमुख देव हैं किले के ही निकले हिस्से में दुर्गम गुफा में भगवान भूतेश्वर महादेव जी भी विराजमान है भगवान भूतेश्वर महादेव जी और अजय पाल बाबा जी की महिमा हजारों साल से चली आ रही है देखने में अजय पाल बाबा की मूर्ति भगवान विष्णु की मूर्ति प्रतीत होती है जिसे लोग अजय पाल बाबा की प्रतिमा कहते हैं।

बताया जाता है कि अजय पाल बाबा एक बहुत बड़े तांत्रिक थे तपस्वी से साधक थे जिन्होंने किले में रहकर के कठोर साधना की थी और यहीं पर समाधि भी ली थी प्रसिद्ध धार्मिक पत्रिका कल्याण के तीर्थांक में भगवान राम के पितामह राजा आज के भी आगमन के प्रमाण बताए जाते हैं।।वह प्रत्येक मकर संक्रांति के दिन यहां पर आकर भंडारा करते थे पूजा अर्चना करते थे कुल मिलाकर जयगढ़ का किला प्राचीन समय में धार्मिक महत्व का रहा है बाद में सैनिक स्वरूप प्रदान किया गया जिस तरह कालिंजर के धार्मिक स्वरूप का वर्णन कई पुराने में भी मिलता है बाद में कालिंजर किला का निर्माण कराया गया और सैनिक स्वरूप प्रदान किया गया इस तरह जयगढ़ का भी धार्मिक महत्व रहा है प्राचीन समय में अजयगढ़ के पास देव पर्वत का भी एक धार्मिक इतिहास है देव पर्वत की महिमा भी अत्यंत प्राचीन है कालिंजर का किला और देव पर्वत और जयगढ़ का प्राचीन किला की महिमा हजारों सालों से चली आ रही है।।अजयगढ़ के किले में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर 14 जनवरी से 20 जनवरी तक विशाल मेले का आयोजन होता है प्रातः से ही लोग किले में पहुंच करके स्नान करते हैं और अजय पाल भगवान के दर्शन करके प्रसाद अर्पित करते हैं पूर्व में अजय पाल भगवान की प्रतिमा चोरी हो गई थी जो बाद में बरामद हो गई थी तब से वह पुरातत्व संग्रहालय रीवा में विराजमान रहती है केवल मकर संक्रांति के दिन किले में लाया जाता है भक्तों के दर्शन के लिए क्षेत्रवासी चाहते हैं कि यह प्रतिमा पूरे वर्ष रखी जाए।

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