मड़ला घाटी में सुगम आवागमन को लेकर सड़क सुरक्षा समिति की बैठक, जाम से निजात के लिए बनेगा एक्शन प्लान
By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 03 नवम्बर 2026 | Panna News
Panna News: पन्ना जिले की सबसे बड़ी और जटिल समस्या बन चुकी मड़ला घाटी में लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाने के लिए आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सड़क सुरक्षा समिति की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें पन्ना विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और कलेक्टर हर्ष सिंह ने घाटी में सुगम आवागमन और आमजनों की सुरक्षित यात्रा को लेकर लंबी चर्चा की।
बैठक में यह तय किया गया कि एलिवेटेड सड़क निर्माण से पहले स्थानीय स्तर पर ही आवश्यक सहयोग और समन्वय के जरिए स्थिति को कैसे बेहतर बनाया जाए, इस पर तुरंत काम शुरू किया जाएगा। बैठक में जे.के. सीमेंट फैक्ट्री के प्रतिनिधि, बस यूनियन के पदाधिकारी, पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनसे सुझाव लिए गए।
घाटी में क्यों लगता है रोजाना जाम, क्या है असली वजह?
पन्ना से सतना जाने वाले बमीठा-सतना सड़क मार्ग पर मड़ला घाटी एक बड़ा ब्लैक स्पॉट बन चुकी है। यहां घाट सेक्शन काफी संकरा है और सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और शोल्डर टूटे हुए हैं। सबसे बड़ी समस्या जे.के. सीमेंट और अन्य कंपनियों के बड़े-बड़े ट्राले और हैवी ट्रकों की है। सैकड़ों ट्रक रोजाना इस मार्ग से गुजरते हैं।
घाटी में चढ़ाई ज्यादा होने के कारण कई बार बड़े ट्राले बीच में ही खराब हो जाते हैं या उनका ब्रेक फेल हो जाता है, जिससे पीछे लंबा जाम लग जाता है। कई बार तो यह जाम 5-6 घंटे तक लगा रहता है, जिसमें यात्री बसें, एंबुलेंस और छोटे वाहन फंसे रहते हैं। गर्मी और बरसात में तो स्थिति और भी बदतर हो जाती है। इसी समस्या को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद विधायक और कलेक्टर ने खुद मोर्चा संभाला है।
विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने दिए सख्त निर्देश
बैठक में पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने काफी सख्त लहजे में कहा कि घाटी में निरंतर जाम की स्थिति के कारण आम नागरिकों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह सिर्फ जाम की समस्या नहीं, बल्कि सुरक्षा की भी समस्या है। इसलिए घाट सेक्शन में तत्काल वांछित सुधार की कार्यवाही की जाए।
उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अन्य बेहतर उपायों को भी लागू किया जाए। प्राथमिकता के साथ बमीठा-सतना सड़क मार्ग पर पहले घाटी क्षेत्र में आवश्यक कार्य करवाया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि जाम में फंसे वाहनों को तुरंत निकालने के लिए सुविधाजनक स्थान पर क्रेन की व्यवस्था स्थाई रूप से सुनिश्चित की जाए। जब तक विभिन्न स्थानों पर शोल्डर भराव का कार्य पूरा नहीं होता, तब तक क्रेन वहीं तैनात रहेगी।
विधायक ने यह भी कहा कि वाहन यूनियन के पदाधिकारियों और वाहन चालकों से भी इस संबंध में आवश्यक चर्चा कर ली जाए। कई बार चालक घाटी में ओवरटेक करने की कोशिश करते हैं, जिससे जाम और हादसे होते हैं। इसलिए आवश्यकता के अनुसार ट्रैफिक प्वाइंट भी लगाया जाए ताकि यातायात को नियंत्रित किया जा सके।
जे.के. सीमेंट के ट्रकों का रूट होगा डायवर्ट
बैठक में सबसे बड़ा निर्णय जे.के. सीमेंट के ट्रकों को लेकर लिया गया। विधायक श्री सिंह ने निर्देश दिए कि जे.के. सीमेंट के ट्रकों को किशनगढ़ मार्ग से छतरपुर रूट पर डायवर्ट करने की व्यवस्था लागू करने से पहले उस रोड में आवश्यक सुधार कर लिया जाए। इससे मड़ला घाटी पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा।
साथ ही बड़े ट्रालों एवं हैवी ट्रैफिक को नियंत्रित रूप से रोककर निकालने की व्यवस्था बनाई जाएगी। यानी घाटी में एक साथ कई बड़े वाहनों को नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि 10-10 वाहनों के जत्थे में रोका-रोककर निकाला जाएगा, ताकि जाम की स्थिति न बने। मार्ग पर खतरनाक मोड़ों पर मिरर और साइन बोर्ड आदि लगवाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि ड्राइवरों को पहले से ही अंदाजा लग जाए।
एडिशनल एसपी ने पेश किया हाईटेक ट्रैफिक प्लान
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना चौहान द्वारा मड़ला घाटी के लिए एक हाईटेक ट्रैफिक योजना का प्रेजेंटेशन दिया गया। उन्होंने बताया कि घाटी में मोबाइल नेटवर्क और विद्युत व्यवस्था का अभाव है, जिसके कारण कई बार व्यवस्था बिगड़ जाती है। इसलिए उन्होंने सोलर पैनल और लिथियम बैटरी के उपयोग से यातायात प्रबंधन की रूपरेखा के बारे में बताया।
उनकी योजना के अनुसार, घाटी में गति सीमा के पालन के लिए कैमरे, सिग्नल और रडार लगाए जाएंगे जो सोलर से चलेंगे। इससे यह पता चल सकेगा कि कौन सा वाहन ओवरस्पीड में है और कहां जाम लग रहा है। कंट्रोल रूम से ही पूरी घाटी पर नजर रखी जा सकेगी।
कलेक्टर हर्ष सिंह ने दिए 4 नवंबर से काम शुरू करने के निर्देश
जिला कलेक्टर हर्ष सिंह ने बैठक में संबंधित विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि गड्ढे एवं शोल्डर भराव का कार्य 4 नवंबर से ही आरंभ कर दिया जाए। इसमें किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) और नेशनल हाईवे के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपनी मशीनरी तुरंत मौके पर भेजें।
कलेक्टर ने कहा कि मड़ला घाटी सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि पन्ना जिले की लाइफलाइन है। यहां से रोजाना हजारों लोग निकलते हैं, इसलिए इसे सुरक्षित और सुगम बनाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।
क्या है एलिवेटेड रोड का प्रोजेक्ट, कब मिलेगा स्थाई समाधान?
बैठक में बताया गया कि मड़ला घाटी में जाम की समस्या का स्थाई समाधान एलिवेटेड सड़क है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और इस पर तेजी से काम चल रहा है। लेकिन एलिवेटेड रोड बनने में कम से कम 2-3 साल का समय लगेगा। तब तक के लिए स्थानीय स्तर पर जो भी बेहतर हो सकता है, वह किया जाएगा।
स्थानीय लोगों और बस ऑपरेटरों ने इस बैठक की सराहना की है। लोगों का कहना है कि अगर क्रेन की स्थाई व्यवस्था और ट्रकों का डायवर्जन हो जाता है तो 70% जाम की समस्या खत्म हो जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन 4 नवंबर से शुरू होने वाले काम को कितनी तेजी से पूरा करता है।
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)


