आईएएस प्रीति मैथिल को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी, नीति निर्धारण के लिए मिली हरी झंडी
By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 03 नवम्बर 2026 | MP News
MP News: मध्य प्रदेश कैडर की तेजतर्रार और ईमानदार छवि वाली आईएएस अधिकारी प्रीति मैथिल को लेकर केंद्र सरकार से बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 2009 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रीति मैथिल को केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव या उसके समकक्ष स्तर के पदों पर नियुक्ति के लिए पात्र मानते हुए हरी झंडी दे दी है।
कुछ समय पहले तक उनकी फाइल को 'लेफ्ट-ओवर' कैटेगरी में रखा गया था, जिसको लेकर प्रशासनिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं थीं। लेकिन अब DoPT द्वारा उनकी फाइल को क्लीयरेंस मिलते ही यह साफ हो गया है कि वह जल्द ही केंद्र सरकार के किसी बड़े मंत्रालय में नीति निर्माण की अहम भूमिका में नजर आ सकती हैं। इस नए प्रशासनिक विकास के साथ ही वह केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों में वरिष्ठ नीति निर्माण और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह से पात्र हो गई हैं।
कौन हैं आईएएस प्रीति मैथिल, अभी कहां हैं पदस्थ
आईएएस प्रीति मैथिल 2009 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की अधिकारी हैं। वर्तमान में वह मध्य प्रदेश क्षेत्र के लिए भोपाल स्थित TRIFED यानी ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया में महाप्रबंधक (General Manager) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। TRIFED भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख संस्था है, जो आदिवासी समुदायों द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और उनके सशक्तिकरण के लिए काम करती है। यहां पर रहकर उन्होंने आदिवासी उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण काम किया है।
लेफ्ट-ओवर कैटेगरी से हरी झंडी तक, क्या होता है इसका मतलब?
कई लोगों के मन में सवाल है कि यह लेफ्ट-ओवर कैटेगरी क्या होती है। दरअसल, केंद्र में संयुक्त सचिव स्तर के पदों के लिए हर साल सिविल सेवा बोर्ड अधिकारियों की पात्रता की समीक्षा करता है। इसमें 2009 बैच के कई अधिकारियों को पहले ही पैनल में शामिल कर लिया गया था, लेकिन कुछ अधिकारियों की फाइलें किसी कारणवश होल्ड पर रखी जाती हैं, जिसे प्रशासनिक भाषा में लेफ्ट-ओवर कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं होता कि अधिकारी अयोग्य है, बल्कि कई बार दस्तावेज या अन्य प्रक्रियाओं के कारण देरी होती है।
प्रीति मैथिल की फाइल भी इसी कैटेगरी में थी। अब DoPT ने उनकी फाइल को मंजूरी दे दी है। इसका सीधा मतलब है कि अब उन्हें केंद्र में किसी भी मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में तैनाती दी जा सकती है। यह उनके करियर के लिए एक बहुत बड़ा ब्रेक माना जा रहा है।
मजदूर की बेटी से आईएएस तक, बेहद प्रेरणादायक रहा है सफर
प्रीति मैथिल की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की रहने वाली प्रीति एक बेहद सामान्य परिवार से आती हैं। उनके पिता एक शुगर मिल में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, घर में संसाधनों की भारी कमी थी।
लेकिन प्रीति ने इन सभी कठिनाइयों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। वे बचपन से ही पढ़ाई में बहुत तेज थीं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सीहोर से ही पूरी की और उसके बाद आगे की पढ़ाई जारी रखी। आर्थिक तंगहाली के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी की तैयारी शुरू की।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने महज 23 वर्ष की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में UPSC 2008 की परीक्षा में ऑल इंडिया 92वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनकर सबको चौंका दिया था। 23 साल की उम्र में आईएएस बनना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, वह भी पहले प्रयास में। उनकी इस सफलता की कहानी आज भी मध्य प्रदेश के लाखों युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
सागर, रीवा और मंडला में कलेक्टर के रूप में दिखाया दम
मध्य प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान आईएएस प्रीति मैथिल कई महत्वपूर्ण जिलों की कलेक्टर रह चुकी हैं। उन्होंने सागर, रीवा और मंडला जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण जिलों में कलेक्टर के रूप में काम किया है।
सागर में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सुधार किए थे। रीवा में उनके कार्यकाल को आज भी याद किया जाता है। लेकिन सबसे ज्यादा सराहना उन्हें कोरोना काल के दौरान मिली थी। जब पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था, तब उन्होंने मंडला जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में जिस तरह से कोरोना प्रबंधन किया, उसकी हर तरफ तारीफ हुई थी। उन्होंने न सिर्फ अस्पतालों में व्यवस्थाएं सुधारीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को वैक्सीनेशन के लिए भी प्रेरित किया था।
उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे फील्ड में जाकर काम करने में विश्वास रखती हैं। वे दफ्तर में बैठकर फाइलें निपटाने के बजाय गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनना पसंद करती हैं।
केंद्र में जाने से क्या होगा फायदा?
अब जब उन्हें केंद्र में संयुक्त सचिव स्तर के लिए इम्पैनल कर दिया गया है, तो माना जा रहा है कि जल्द ही उन्हें कोई बड़ा मंत्रालय मिल सकता है। आमतौर पर इस स्तर के अधिकारियों को महिला एवं बाल विकास, जनजातीय कार्य, ग्रामीण विकास, शिक्षा या स्वास्थ्य जैसे मंत्रालयों में अहम जिम्मेदारी दी जाती है।
चूंकि उन्हें आदिवासी क्षेत्र और TRIFED में काम करने का लंबा अनुभव है, इसलिए संभावना है कि उन्हें जनजातीय कार्य मंत्रालय या महिला सशक्तिकरण से जुड़े किसी मंत्रालय में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। केंद्र में नीति निर्माण के स्तर पर काम करने का अनुभव उनके करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा और इसका सीधा फायदा देश की नीतियों को भी मिलेगा, क्योंकि उन्हें जमीनी हकीकत का पता है।
मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय
प्रीति मैथिल की इस उपलब्धि पर मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में खुशी का माहौल है। एक मजदूर परिवार की बेटी का इस मुकाम तक पहुंचना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा आपको सफलता से नहीं रोक सकती। मध्य प्रदेश कैडर के कई आईएएस अधिकारियों ने उन्हें बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि वे केंद्र में भी अपनी ईमानदार और तेजतर्रार छवि को बरकरार रखेंगी।
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)

