Dharampur Police ने 100 दिन बाद पकड़ा भैंस चोरी गैंग

धरमपुर पुलिस ने भैंस चोरी गिरोह के 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार

पन्ना पुलिस की बड़ी कामयाबी: 100 दिन की मेहनत रंग लाई, धरमपुर पुलिस ने किया भैंस चोरी गिरोह का पर्दाफाश, 4 शातिर गिरफ्तार

By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 2 अक्टूबर 2026 | Dharampur News

Ajaigarh News: अजयगढ़ से हमारे संवाददाता राजकुमार प्रजापति ने बताया कि कहते हैं कि बुंदेलखंड में एक किसान के लिए उसकी भैंस सिर्फ एक पशु नहीं होती, बल्कि वो उसके परिवार का एक सदस्य होती है, उसकी चलती-फिरती बैंक होती है। जब वो ही भैंस रातों-रात चोरी हो जाए तो किसान पर क्या बीतती है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। कुछ ऐसी ही कहानी पन्ना जिले के धरमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम हरदी के रहने वाले किसान बेटू खान की है।

18 जून 2026 की रात को उनके घर के सामने बंधी भैंस और उसकी छोटी पड़िया को कोई अज्ञात चोर रस्सी काट कर चुरा ले गया था। बेटू खान सुबह उठे तो उनके होश उड़ गए। करीब 85 हजार रुपये की संपत्ति एक ही रात में गायब हो गई थी। उन्होंने हर जगह तलाश किया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। थक-हार कर वे धरमपुर थाने पहुंचे और पुलिस से गुहार लगाई।

आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में भैंस चोरी के मामले में पुलिस ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेती, लेकिन इस बार पन्ना पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता नायडू ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया। उन्होंने इस केस को अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया और धरमपुर पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया कि चाहे 100 दिन लग जाएं, लेकिन इस चोरी का खुलासा होना चाहिए और किसान की भैंस वापस आनी चाहिए।

और आखिरकार 100 दिन की लगातार मेहनत, मुखबिर तंत्र की सक्रियता और साइबर सेल की तकनीकी मदद से धरमपुर पुलिस ने वो कर दिखाया जो असंभव लग रहा था। पुलिस ने इस भैंस चोरी के अंतरजिला गिरोह के 4 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और चोरी गई भैंस और पड़िया को छतरपुर जिले के ग्राम गौरेया से सकुशल बरामद कर लिया है। इस सफलता के बाद पूरे अजयगढ़ और धरमपुर अंचल में पुलिस की जमकर सराहना हो रही है। फरियादी बेटू खान ने भी पुलिस का आभार व्यक्त किया है।

18 जून की रात को आखिर हुआ क्या था? जानिए पूरी घटना

यह घटना 18 जून 2026 की है। थाना धरमपुर क्षेत्र के ग्राम हरदी निवासी फरियादी बेटू खान ने थाने में आकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पास एक भैंस और एक छोटी पड़िया है, जो रोज दूध देती है। इसी दूध को बेच कर उनके घर का खर्च चलता है।

बेटू खान ने बताया कि वह रोज की तरह शाम को 8 बजे अपनी भैंस और पड़िया को अपने घर के सामने बनी छानी के नीचे बांध कर सो गए थे। रात में गर्मी ज्यादा होने के कारण वे घर के अंदर सो रहे थे। सुबह करीब 4 बजे जब उनकी पत्नी दूध निकालने के लिए उठी तो देखा कि छानी में भैंस और पड़िया दोनों गायब थीं। दोनों के गले में बंधी रस्सी भी धारदार हथियार से कटी हुई जमीन पर पड़ी थी।

पहले तो उन्हें लगा कि शायद भैंस खुद ही रस्सी तुड़वा कर कहीं चली गई होगी। उन्होंने सुबह 4 बजे से लेकर 7 बजे तक आसपास के खेतों, जंगल और पूरे गांव में तलाश किया। अपने रिश्तेदारों को फोन किया, लेकिन कहीं कोई पता नहीं चला। तब उन्हें यकीन हो गया कि उनकी भैंस चोरी हो गई है। उसके बाद वह सीधे धरमपुर थाने पहुंचे। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना धरमपुर में अपराध क्रमांक 303/2026, धारा 303(2) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

आपको बता दें कि पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 379 में चोरी का मामला दर्ज होता था, लेकिन अब नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धारा 303(2) में चोरी का मामला दर्ज किया जाता है, जिसमें 7 साल तक की कठोर सजा का प्रावधान है।

एक गरीब किसान के लिए भैंस का क्या महत्व है?

शहर में रहने वाले लोगों को शायद इस बात का अंदाजा न हो कि एक किसान के लिए भैंस का क्या मतलब होता है। बेटू खान जैसे छोटे किसान के लिए भैंस ही उसकी सबसे बड़ी संपत्ति होती है। आज के बाजार में एक अच्छी दुधारू मुर्रा नस्ल की भैंस की कीमत 70,000 से लेकर 1,00,000 रुपये तक होती है। और उसकी छोटी पड़िया की कीमत भी 15,000 से 20,000 रुपये होती है। यानी एक ही रात में बेटू खान की लगभग 90 हजार से 1 लाख रुपये की संपत्ति चोरी हो गई थी।

गांव में बैंक तो होते हैं, लेकिन किसान का असली बैंक उसकी भैंस ही होती है। जब घर में शादी-ब्याह हो या बच्चों की फीस भरनी हो या कोई बीमार हो जाए, तो किसान अपनी भैंस का दूध बेच कर पैसे का इंतजाम करता है। कभी-कभी तो भैंस को बेच कर ही बड़ा खर्च निकाला जाता है। ऐसे में भैंस का चोरी हो जाना एक गरीब परिवार के लिए बहुत बड़ा आर्थिक संकट होता है। बेटू खान के परिवार पर भी यही संकट आ गया था।

एसपी निवेदिता नायडू ने क्यों लिया इस केस को इतना गंभीरता से?

पन्ना जिले में पिछले एक साल से पशु चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषकर धरमपुर, अजयगढ़, गुनौर और अमानगंज थाना क्षेत्रों में भैंस चोरी के कई मामले सामने आए हैं। ये चोर इतने शातिर हैं कि रात के अंधेरे में किसानों के घर से भैंस खोलकर ले जाते हैं और सुबह होते-होते उसे 100 किलोमीटर दूर दूसरे जिले के पशु बाजार में बेच देते हैं।

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू ने जब जिले के अपराधों की समीक्षा की तो उन्होंने पाया कि पशु चोरी की घटनाएं एक पैटर्न पर हो रही हैं। यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का काम है। इसलिए उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुश्री वंदना चौहान के साथ एक मीटिंग की और निर्देश दिया कि धरमपुर की इस भैंस चोरी की घटना का हर हाल में खुलासा होना चाहिए, ताकि अन्य किसानों में भी पुलिस के प्रति विश्वास बना रहे।

एसपी के निर्देशन में धरमपुर पुलिस के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई। इस टास्क फोर्स का नेतृत्व धरमपुर थाना प्रभारी उनि. अनिल सिंह को सौंपा गया। इस टास्क फोर्स को तीन स्पष्ट टास्क दिए गए: पहला - चोरी गई भैंस की बरामदगी, दूसरा - आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी, और तीसरा - इस गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा करना।

100 दिन का लंबा ऑपरेशन: पुलिस ने 3 लेयर में की जांच

इस केस को सुलझाना इतना आसान नहीं था। चोरों ने कोई सुराग नहीं छोड़ा था। न तो मौके पर कोई पैरों के निशान थे और न ही किसी ने चोरों को देखा था। कई बार तो ऐसे मामलों में पुलिस के हाथ खाली रह जाते हैं। लेकिन धरमपुर थाना प्रभारी उनि. अनिल सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी जांच को 3 लेयर में शुरू किया।

पहली लेयर - मुखबिर तंत्र को किया सक्रिय:

 पुलिस टीम ने सबसे पहले अपने मुखबिरों के जाल को सक्रिय किया। धरमपुर, सरवई, गुनौर और छतरपुर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में ऐसे लोगों पर नजर रखी गई जो पहले पशु चोरी में पकड़े गए हैं या जो पशुओं की खरीद-फरोख्त का काम करते हैं। हर हफ्ते मुखबिरों से गुप्त मीटिंग की गई। आसपास के सभी बड़े पशु बाजारों - बड़ामलहरा, बिजावर, छतरपुर पशु मंडी, ईसागढ़ पशु मंडी में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को भेजा गया और चोरी गई भैंस के हुलिए की फोटो दिखाई गई। पुलिस को शक था कि चोर भैंस को किसी बड़े पशु बाजार में बेचने की कोशिश करेंगे।

दूसरी लेयर - साइबर सेल की तकनीकी सहायता:

 यह इस केस का सबसे अहम मोड़ था। जब मुखबिर तंत्र से कोई ठोस सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने साइबर सेल पन्ना से तकनीकी सहायता ली। साइबर सेल ने घटना वाली रात ग्राम हरदी गांव और उसके आसपास लगे मोबाइल टावरों का डाटा निकाला। टावर डंप एनालिसिस में देखा गया कि घटना वाली रात 12 बजे से 4 बजे के बीच हरदी गांव के आसपास कौन-कौन से मोबाइल नंबर एक्टिव थे।

जांच में कई ऐसे नंबर मिले जो घटना के बाद से लगातार बंद थे या अपनी लोकेशन बदल रहे थे। कुछ नंबर ऐसे भी थे जो सिर्फ रात में ही चालू होते थे। जब तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से मिली जानकारी का आपस में मिलान किया गया तो 4 नाम एकदम स्पष्ट रूप से सामने आए। इन चारों के नाम पहले भी पशु चोरी और लूट के मामलों में पुलिस रिकॉर्ड में आ चुके थे।

तीसरी लेयर - संदिग्धों से सख्ती से पूछताछ:

 नाम सामने आने के बाद पुलिस ने बिना देर किए संदिग्धों को अलग-अलग जगहों से हिरासत में लिया। शुरुआत में वे पुलिस को गुमराह करते रहे और कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता। लेकिन जब पुलिस ने उनके सामने टावर लोकेशन, मोबाइल की लोकेशन और तकनीकी साक्ष्य रखे तो वे टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने ही 18 जून की रात को बेटू खान की भैंस चुराई थी और उसे छतरपुर जिले में बेच दिया था।

छतरपुर के गौरेया गांव से ऐसे बरामद हुई चोरी की भैंस

आरोपियों के कबूलनामे के बाद पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली कि चोरी गई भैंस और पड़िया को छतरपुर जिले के ग्राम गौरेया, थाना सिविल लाइन क्षेत्र में एक व्यक्ति को बेचा गया है। पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक टीम छतरपुर रवाना की।

वहां ग्राम गौरेया में एक व्यक्ति के घर पर दबिश दी गई तो वहां बंधी हुई भैंस और पड़िया मिली, जो हुलिए से बिल्कुल बेटू खान की भैंस से मिलती-जुलती थी। बेटू खान को मौके पर बुलाया गया तो उन्होंने अपनी भैंस को तुरंत पहचान लिया। भैंस ने भी अपने मालिक को देखा तो रंभाने लगी। जिस व्यक्ति ने भैंस खरीदी थी, उसने बताया कि इन चारों ने उसे बहुत कम दाम, लगभग 45 हजार रुपये में भैंस बेची थी। उसे लगा कि शायद इन्हें पैसों की सख्त जरूरत है, इसलिए उसे शक नहीं हुआ। उसे नहीं पता था कि यह चोरी की भैंस है। पुलिस ने भैंस और पड़िया को सकुशल जब्त कर लिया और पन्ना वापस ले आई।

कौन हैं गिरफ्तार हुए 4 शातिर आरोपी?

भैंस बरामद होने के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि यह एक अंतरजिला गिरोह है, जो पन्ना और छतरपुर दोनों जिलों में सक्रिय था।

1. आशीष पटेल पिता साकेत बिहारी पटेल, उम्र 19 वर्ष, निवासी ग्राम टेड़ी कबरी, थाना सरवई, जिला छतरपुर।* यह गिरोह का सबसे कम उम्र का सदस्य है, लेकिन सबसे शातिर दिमाग इसी का है। इसका मुख्य काम गांवों में रेकी करना होता है कि किसके घर में अच्छी और महंगी भैंस बंधी है।

2. महेंद्र सिंह पटेल पिता श्री रामबोल पटेल, उम्र 26 वर्ष, निवासी ग्राम टेड़ी कबरी, थाना सरवई, जिला छतरपुर।

 यह गिरोह का सरगना बताया जा रहा है। इसके खिलाफ छतरपुर और पन्ना जिले में पहले से 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं। यही पूरी चोरी की योजना बनाता था।

3. रघुनंदन तिवारी पिता बंशगोपाल तिवारी, उम्र 20 वर्ष, निवासी ग्राम कल्याणपुर, थाना धरमपुर, जिला पन्ना।

 यह स्थानीय होने के कारण इसकी अहम भूमिका थी। यह गांव की पूरी जानकारी देता था कि किस किसान के घर में कब लोग सो जाते हैं और कहां से भैंस को आसानी से निकाला जा सकता है।

4. अंजू लोध पिता देशराज लोध, उम्र 19 वर्ष, निवासी ग्राम दुर्गापुर, थाना धरमपुर, जिला पन्ना।

 इसका काम चोरी की गई भैंस को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और उसे बेचने में मदद करना था। यह रात में भैंस को हांक कर जंगल के रास्ते से दूसरे जिले में ले जाता था।

पुलिस ने इनके खिलाफ धारा 303(2) बीएनएस के तहत कार्रवाई की है और उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है। पुलिस अब इनसे अन्य भैंस चोरी की घटनाओं के बारे में भी गहन पूछताछ कर रही है।

बुंदेलखंड में क्यों तेजी से बढ़ रहा है भैंस चोरी का धंधा?

पन्ना, छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़ जैसे बुंदेलखंड के जिलों में भैंस चोरी अब एक संगठित अपराध बन गया है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला कारण है भैंस की बढ़ती कीमत। आज के समय में एक अच्छी मुर्रा नस्ल की भैंस की कीमत 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है, इसलिए चोरों को इसमें ज्यादा मुनाफा दिखता है। दूसरा कारण है सुरक्षा में लापरवाही। आज भी हमारे बुंदेलखंड के किसान रात में अपनी भैंस को अक्सर घर के बाहर खुले में या छानी के नीचे बांधते हैं, जहां कोई सुरक्षा नहीं होती। तीसरा कारण है बेचने में आसानी। चोरी की भैंस को बेचना बहुत आसान है। चोर रात में चोरी करके सुबह किसी दूर के पशु बाजार में ले जाकर बिना किसी कागज के बेच देते हैं।

पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने धरमपुर के अलावा अजयगढ़ और सरवई क्षेत्र में भी 3 से 4 अन्य भैंस चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है, जिनका खुलासा जल्द ही हो सकता है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह: अपनी भैंस को चोरी से कैसे बचाएं?

धरमपुर पुलिस ने इस मामले के बाद किसानों की सुरक्षा के लिए एक एडवाइजरी जारी की है, जिसका पालन हर किसान को करना चाहिए।

1.  अपनी भैंस को रात में घर के अंदर या चारों तरफ से घिरे हुए सुरक्षित बाड़े में बांधें।

2.  भैंस के गले में लोहे की घंटी जरूर लगाएं ताकि रात में उसके हिलने-डुलने पर आवाज आए और आपको पता चल सके।

3.  हो सके तो अपने घर या छानी के पास एक सोलर लाइट जरूर लगाएं। उजाले में चोर आने से डरते हैं।

4.  आजकल बाजार में 1500 रुपये से लेकर 2000 रुपये में भी अच्छे सीसीटीवी कैमरे आ रहे हैं, हो सके तो एक कैमरा जरूर लगाएं।

5.  गांव में रात्रि गश्त की व्यवस्था को मजबूत करें और बारी-बारी से पहरा दें।

6.  अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके गांव में घूमता दिखे और पशुओं के बारे में ज्यादा पूछताछ करे तो तुरंत 100 नंबर या अपने थाने को सूचना दें।

7.  अपनी भैंस का एक साफ फोटो और उसकी पहचान का कोई विशेष निशान अपने मोबाइल में हमेशा रखें, ताकि चोरी होने पर पुलिस को दिखाया जा सके।

इस सफलता में इन पुलिसकर्मियों की रही सराहनीय भूमिका

इस पूरे 100 दिन के लंबे ऑपरेशन को सफल बनाने में धरमपुर थाना प्रभारी उनि. अनिल सिंह की भूमिका सबसे अहम रही। उनके साथ सउनि. लखनलाल प्यासी, प्र.आर. जयेंद्र पाल, अशोक प्रजापती, आरक्षक अजीत, वरुण, प्रमोद पाल, देवराज और साइबर सेल टीम पन्ना के आरक्षकों ने दिन-रात मेहनत की। पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू ने इस पूरी टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है और कहा है कि ऐसे ही पुलिस जनता का विश्वास जीत सकती है।

फरियादी बेटू खान ने अपनी भैंस वापस मिलने पर पुलिस का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि अब भैंस कभी नहीं मिलेगी, लेकिन धरमपुर पुलिस ने 100 दिन बाद भी उनकी भैंस ढूंढ निकाली।

Disclaimer: यह समाचार धरमपुर थाना पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट और थाना प्रभारी से प्राप्त जानकारी के आधार पर लिखा गया है।


हमारी टीम का विशेष आभार

संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)





टिप्पणियाँ