मझगांय डैम आंदोलन: अमित-दिव्या की गिरफ्तारी के बाद विस्थापितों के समर्थन में उतरी कांग्रेस

मझगांय डैम विस्थापितों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंची कांग्रेस की टीम


मझगांय डैम विस्थापितों के समर्थन में उतरी पूरी कांग्रेस: अमित-दिव्या की गिरफ्तारी के बाद गरमाया आंदोलन, कांग्रेस बोली - अब सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेगी लड़ाई।


By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 3 अक्टूबर 2026 | Dharampur News

Ajaigarh News:  अजयगढ़ पन्ना से हमारे संवाददाता राजकुमार प्रजापति ने बताया की पन्ना जिले में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी मुद्दे की हो रही है तो वह है मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के विस्थापितों का आंदोलन। यह आंदोलन पिछले कई महीनों से चल रहा है, लेकिन अब यह एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। विस्थापितों की मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर चल रहे इस शांतिपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा समाजसेवी अमित भटनागर और दिव्या अहिरवार की पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के बाद, इस पूरे मामले ने एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है।

पहले जहां यह लड़ाई सिर्फ कुछ विस्थापित परिवारों की लड़ाई लग रही थी, वहीं अब अमित और दिव्या की गिरफ्तारी के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से आक्रामक होकर विस्थापितों के समर्थन में मैदान में उतर आई है। शुक्रवार को पन्ना जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनीश खान के नेतृत्व में कांग्रेस की पूरी टीम मझगांय डैम के धरना स्थल पर पहुंची और विस्थापितों को यह भरोसा दिलाया कि अब यह लड़ाई अकेले उनकी नहीं है, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी की लड़ाई है।

कांग्रेस नेताओं ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि अगर विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ना पड़ा, या जेल भी जाना पड़ा, तो कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी। कांग्रेस के इस बड़े समर्थन के बाद मझगांय डैम का आंदोलन अब और ज्यादा गरमा गया है और प्रशासन पर दबाव भी बढ़ गया है।

क्या है मझगांय डैम परियोजना और क्यों हो रहा है विवाद?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मझगांय डैम परियोजना क्या है और इसका विवाद क्या है। मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस डैम के बनने से अजयगढ़ और आसपास के सैकड़ों गांवों के हजारों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, जिससे उनकी फसलें लहलहा उठेंगी। सरकार के लिए यह एक विकास की परियोजना है।

लेकिन इस विकास की एक बड़ी कीमत भी है, जो वहां के स्थानीय किसानों को चुकानी पड़ रही है। इस डैम के डूब क्षेत्र में आने के कारण कई गांवों के सैकड़ों परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन, अपने घर और अपने खेतों से बेघर होना पड़ा है। इन्हीं लोगों को विस्थापित कहा जाता है।

मझगांय डैम धरना स्थल पर गांधी और शास्त्री जयंती मनाते कांग्रेस नेता और विस्थापित

सरकारी नियम के अनुसार, जब भी किसी को उसकी जमीन से विस्थापित किया जाता है, तो उसे जमीन के बदले उचित मुआवजा, मकान के बदले मकान या उसका पैसा, और पुनर्वास के लिए पूरी सुविधाएं दी जानी चाहिए। लेकिन विस्थापितों का आरोप है कि मझगांय डैम के मामले में प्रशासन ने इन नियमों का पालन नहीं किया है।

विस्थापितों का कहना है कि उन्हें उनकी जमीन का बहुत कम मुआवजा दिया गया है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके मकान का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। कई लोगों को पुनर्वास के तहत मिलने वाली जमीन और अन्य सुविधाएं नहीं दी गई हैं। सबसे बड़ा आरोप यह है कि मुआवजा वितरण में भारी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी हुई है। अपात्र लोगों को पैसा दे दिया गया और जो असली पात्र हैं, उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसी अन्याय के खिलाफ ये विस्थापित पिछले कई महीनों से धरने पर बैठे हैं। इन्होंने चिता आंदोलन जैसा अनोखा प्रदर्शन भी किया था, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हुई थी।

अमित भटनागर और दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी ने कैसे बदला आंदोलन का रुख?

इस आंदोलन को पिछले कुछ महीनों से दो युवा समाजसेवी अमित भटनागर और दिव्या अहिरवार लीड कर रहे थे। ये दोनों निस्वार्थ भाव से विस्थापितों की आवाज बनकर प्रशासन के सामने उनकी मांगों को रख रहे थे। ये विस्थापितों के साथ ही धरना स्थल पर रहते थे, उनकी समस्याएं सुनते थे और उन्हें कानूनी सलाह भी देते थे।

लेकिन कुछ दिन पहले प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के लिए इन दोनों को ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना था कि इनके द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन से कानून व्यवस्था बिगड़ रही है। लेकिन विस्थापितों का कहना है कि ये दोनों शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे और प्रशासन ने जानबूझकर उनकी आवाज को दबाने के लिए यह कार्रवाई की है।

अमित और दिव्या की गिरफ्तारी के बाद विस्थापितों में पहले तो मायूसी छा गई। उन्हें लगा कि अब उनका आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा। लेकिन इस गिरफ्तारी ने एक नया काम किया। इसने इस आंदोलन को एक नई सहानुभूति और एक बड़ा राजनीतिक समर्थन दिला दिया। कांग्रेस पार्टी को लगा कि अब इस मुद्दे पर चुप रहना ठीक नहीं है और वह पूरी ताकत से विस्थापितों के साथ आ गई।

धरना स्थल पर गांधी-शास्त्री जयंती और उपवास: कांग्रेस ने दिया सत्याग्रह का संदेश

शुक्रवार को जब कांग्रेस की टीम धरना स्थल पर पहुंची तो उन्होंने अपने विरोध प्रदर्शन को एक अलग ही रूप दिया। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक रैली नहीं, बल्कि एक सत्याग्रह का रूप दिया।

2 अक्टूबर को गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर कांग्रेस नेताओं और विस्थापितों ने धरना स्थल पर ही दोनों महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इसके बाद सभी ने एक दिन का सांकेतिक उपवास रखा। उपवास के माध्यम से कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चल कर विस्थापितों को न्याय दिलाएगी, जैसे महात्मा गांधी ने देश को आजादी दिलाई थी।

मझगांय डैम विस्थापितों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंची कांग्रेस की टीम

धरना स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने "रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम" का भजन गाया और "मोहन सरकार को सद्बुद्धि दे" के नारे भी लगाए। यह दृश्य बहुत ही भावुक करने वाला था, जहां एक तरफ विस्थापित अपने हक के लिए बैठे थे और दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता उनके साथ उपवास पर बैठे थे।

आपकी लड़ाई अब कांग्रेस की लड़ाई है’ - भरत मिलन पांडे ने भरी हुंकार

धरना स्थल पर सबसे ज्यादा जोश भरने वाला भाषण रहा पूर्व प्रत्याशी भरत मिलन पांडे का। भरत मिलन पांडे अपने बेबाक और चिरपरिचित अंदाज के लिए पूरे पन्ना जिले में जाने जाते हैं। उन्होंने मंच से सीधे प्रशासन को ललकारा और विस्थापितों में एक नया जोश भर दिया।

उन्होंने कहा, "कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार जनता के मालिक नहीं हैं, बल्कि जनता के सेवक हैं। उन्हें जनता का काम करना चाहिए। जनता टैक्स देती है, तब जाकर उनकी तनख्वाह आती है। अगर वे जनता की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते, तो उन्हें यहां रहने का कोई हक नहीं है। वे अपना ट्रांसफर करवा लें और कहीं और चले जाएं।"

भरत मिलन पांडे ने विस्थापितों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस अब इस मामले में पूरी लिस्ट तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि हम एक-एक विस्थापित परिवार का सर्वे कराएंगे। किसका मकान डूब क्षेत्र में आ रहा है, किसकी कितनी जमीन जा रही है, किसको मुआवजा मिला और किसको नहीं मिला, किसको पुनर्वास का लाभ नहीं मिला, इन सब की एक-एक जानकारी जुटाई जाएगी।

उन्होंने कहा, "हम वकीलों की एक मजबूत टीम तैयार कर रहे हैं। जरूरत पड़ी तो इस लड़ाई को हम पन्ना जिला कोर्ट से लेकर जबलपुर हाईकोर्ट और हाईकोर्ट से लेकर दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। लेकिन किसी भी पात्र विस्थापित का हक हम मरने नहीं देंगे। चाहे हमें इसके लिए कुछ भी करना पड़े।"

अपने भाषण के अंत में उन्होंने एक बड़ा ऐलान किया, जिस पर धरना स्थल पर तालियां बजने लगीं। उन्होंने कहा कि अगर विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए जेल भी जाना पड़ा तो कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता जेल जाने को तैयार है। हम पीछे नहीं हटेंगे, हम डरने वाले नहीं हैं।

हम नेतागिरी करने नहीं, आपकी लड़ाई लड़ने आए हैं’ - प्रभारी राजभान सिंह

कांग्रेस के जिला प्रभारी राजभान सिंह ने भी धरना स्थल पर विस्थापितों को संबोधित किया और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वे यहां कोई राजनीतिक रोटियां सेंकने नहीं आए हैं।

राजभान सिंह ने कहा, "हम भारत देश में रहते हैं, इसलिए हम सब आपस में भाई-बहन हैं। इसी रिश्ते के नाते कांग्रेस आपकी समस्याओं की लड़ाई लड़ने यहां आई है। हम यहां नेतागिरी करने नहीं आए हैं, बल्कि आपकी लड़ाई लड़ने आए हैं और यह संघर्ष हमारी अंतिम सांस तक जारी रहेगा।"

उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पन्ना जिले में भ्रष्टाचार चरम पर है। मझगांय डैम के मुआवजा वितरण में भारी कमीशनखोरी हो रही है। गरीब विस्थापितों के हक का पैसा बिचौलिए और अधिकारी मिलकर खा रहे हैं। उन्होंने मंच से विस्थापितों से अपील की कि यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी एक रुपये की भी रिश्वत मांगता है तो उसकी सूचना तुरंत अजयगढ़ में बैठे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को दें। कांग्रेस उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करवाएगी।

उन्होंने कहा कि पन्ना जिले के सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों, विधायक और सांसद को गरीबों की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। वे सिर्फ सत्ता के दलालों और कमीशनखोरों को संरक्षण दे रहे हैं और गरीबों की आवाज को दबा रहे हैं। कांग्रेस ऐसे लोगों को बख्शेगी नहीं।

न चुनाव है, न वोट मांगने आए हैं’ — जिलाध्यक्ष अनीश खान का बड़ा बयान

जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनीश खान ने अपने संबोधन में विपक्ष के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है।

अनीश खान ने कहा, "आज न कोई चुनाव है और न ही हम यहां वोट मांगने आए हैं। अगर हमें राजनीति करनी होती तो हम चुनाव के समय आते। हम इसलिए आए हैं क्योंकि विस्थापितों के साथ जो बर्बरता हुई है और मुआवजा वितरण में जो विसंगतियां सामने आई हैं, वह बहुत ही शर्मनाक है। प्रशासन ने कई अपात्र लोगों को लाभ दे दिया और जो असली हकदार हैं, उन्हें दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया। यह अन्याय है।"

उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने अब इसकी पूरी रणनीति बना ली है। वरिष्ठ नेता भरत मिलन पांडे और जिला उपाध्यक्ष राकेश गर्ग के नेतृत्व में एक 11 सदस्यीय टीम बनाई जाएगी। यह टीम अगले 15 दिनों तक हर विस्थापित परिवार के घर-घर जाकर उनकी जानकारी एकत्र करेगी। उनके मकान, जमीन, मुआवजा और पुनर्वास से संबंधित समस्त दस्तावेजों की एक लिस्ट तैयार की जाएगी, ताकि पात्र लोगों की समस्याओं को सामने लाकर उनके समाधान के लिए लड़ाई लड़ी जा सके।

अनीश खान ने कहा कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओं और नेताओं की कमी नहीं है। एक-एक कार्यकर्ता विस्थापितों के सहयोग के लिए आगे आएगा। उन्होंने दोहराया कि जब तक पात्र विस्थापितों को मुआवजा, विस्थापन राशि एवं पुनर्वास का लाभ नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। यह लड़ाई अब आर-पार की है।

मझगांय डैम धरना स्थल पर गांधी और शास्त्री जयंती मनाते कांग्रेस नेता और विस्थापित

गिरफ्तार आंदोलनकारियों की कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी कांग्रेस

इस आंदोलन में सबसे बड़ा सवाल यह था कि गिरफ्तार किए गए आंदोलनकारी अमित भटनागर और दिव्या अहिरवार का क्या होगा। इस पर भी जिलाध्यक्ष अनीश खान ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।

उन्होंने कहा कि समाजसेवी अमित भटनागर और दिव्या अहिरवार ने विस्थापितों के हक की लड़ाई शुरू की थी। उन्होंने निस्वार्थ भाव से विस्थापितों की आवाज उठाई, जिसके कारण प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लेकिन उनकी गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस इस संघर्ष को और मजबूती से आगे बढ़ाएगी। गिरफ्तार किए गए दोनों आंदोलनकारियों की कानूनी लड़ाई भी कांग्रेस पार्टी लड़ेगी। उनके लिए अच्छे वकीलों की व्यवस्था की जाएगी, उनकी जमानत करवाई जाएगी और उन्हें न्याय दिलाया जाएगा।

अनीश खान ने कहा कि यह देश संविधान और कानून से चलता है। बाबा साहेब अंबेडकर ने जो संविधान बनाया है, उसमें हर गरीब को न्याय का हक है। प्रशासन को जनता के प्रति न्यायसंगत, पारदर्शी और संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। दमन से किसी भी आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता।

कांग्रेस के समर्थन के बाद क्या बदलेगा समीकरण?

अमित-दिव्या की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस के इस तरह से पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने से मझगांय डैम का आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। पहले यह सिर्फ विस्थापितों की लड़ाई थी, लेकिन अब यह कांग्रेस बनाम भाजपा सरकार की लड़ाई बन गई है।

कांग्रेस के समर्थन से विस्थापितों में एक नया जोश और एक नई उम्मीद आ गई है। उन्हें लग रहा है कि अब उनकी आवाज भोपाल से लेकर दिल्ली तक सुनी जाएगी। आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर जिला मुख्यालय पन्ना में बड़े प्रदर्शन और राज्यपाल के नाम ज्ञापन की भी तैयारी में है।

कार्यक्रम का संचालन जिला उपाध्यक्ष राकेश गर्ग ने किया, जबकि कार्यक्रम का आयोजन ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश यादव द्वारा किया गया।

इस दौरान स्वतंत्र अवस्थी, रमा बुंदेला, संजय पटेल, मार्तण्ड देव बुंदेला, राज बहादुर पटेल, सौरभ पटेरिया, हिम्मत बागरी, नृपेंद्र सिंह, जगदीश यादव, शेख मोहम्मद, हसीब खान, आकाश जाटव, कपूर यादव, रवि यादव, राकेश सोनकर, बालकरण यादव, यूनिस खान, कमलेश गुप्ता, राजा जी बुंदेला, आशीष यादव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं विस्थापित मौजूद रहे।


हमारी टीम का विशेष आभार

संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)




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