पन्ना पुलिस की बड़ी सफलता: 100 दिन बाद भैंस चोरी गिरोह का पर्दाफाश, 4 आरोपी गिरफ्तार, भैंस बरामद

पन्ना एसपी निवेदिता नायडू के निर्देशन में धरमपुर पुलिस की कार्रवाई

पन्ना पुलिस की बड़ी कामयाबी: 100 दिन की मेहनत से धरमपुर पुलिस ने किया भैंस चोरी गिरोह का पर्दाफाश, 4 शातिर आरोपी गिरफ्तार, चोरी गई भैंस और पड़िया सकुशल बरामद - अजयगढ़ की पूरी खबर

By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 1 अक्टूबर 2026 | Dharampur News

अजयगढ़ से हमारे संवाददाता राजकुमार प्रजापति ने बताया कि पन्ना जिले की धरमपुर थाना पुलिस ने एक ऐसी चोरी का खुलासा किया है, जिसने 100 दिनों तक पुलिस की नींद उड़ा रखी थी। थाना क्षेत्र के ग्राम हरदी में एक गरीब किसान के घर से रातों-रात भैंस और उसकी पड़िया चोरी हो गई थी। किसान के लिए उसकी भैंस ही उसकी पूरी अर्थव्यवस्था थी। इस घटना के बाद से पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता नायडू ने इस मामले को प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था।

लगातार 100 दिनों तक सक्रिय मुखबिर तंत्र, साइबर सेल की तकनीकी सहायता और ग्राउंड पर कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार धरमपुर पुलिस ने भैंस चोरी के इस सक्रिय अंतरजिला गिरोह के 4 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। चोरी गई भैंस और पड़िया को छतरपुर जिले के ग्राम गौरेया से सकुशल बरामद कर लिया गया है। इस कार्रवाई की पूरे अजयगढ़ अंचल में सराहना हो रही है।

क्या है पूरा मामला? जानिए 18 जून की रात क्या हुआ था

यह घटना 18 जून 2026 की है। थाना धरमपुर क्षेत्र के ग्राम हरदी निवासी फरियादी बेटू खान ने थाने में आकर रिपोर्ट दर्ज कराई।

बेटू खान ने बताया कि उसकी एक भैंस और एक छोटी पड़िया है। वह रोज की तरह शाम को उन्हें अपने घर के सामने बनी छानी के नीचे बांध कर सो गया था। सुबह करीब 4 बजे जब वह दूध निकालने के लिए उठा तो देखा कि छानी में भैंस और पड़िया दोनों गायब थीं। दोनों के गले में बंधी रस्सी भी कटी हुई थी।

बेटू खान ने आसपास के खेतों और गांव में काफी तलाश की, लेकिन कहीं पता नहीं चला। उसके बाद वह सीधे धरमपुर थाने पहुंचा। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना धरमपुर में अपराध क्रमांक 303/2026, धारा 303(2) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

बेटू खान जैसे छोटे किसान के लिए भैंस ही उसकी बैंक है। 70 से 80 हजार रुपये की भैंस और 15 हजार की पड़िया चोरी होने से उसके परिवार पर आर्थिक संकट आ गया था।

एसपी निवेदिता नायडू ने क्यों लिया इस मामले को गंभीरता से?

पन्ना जिले में पिछले एक साल से पशु चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषकर धरमपुर, अजयगढ़, गुनौर और अमानगंज थाना क्षेत्रों में भैंस चोरी के कई मामले सामने आए हैं। ये गिरोह रात के अंधेरे में किसानों के घर से भैंस खोलकर ले जाते हैं और सुबह होते-होते उसे दूसरे जिले के पशु बाजार में बेच देते हैं।

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू ने इस ट्रेंड को गंभीरता से लिया। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुश्री वंदना चौहान को निर्देश दिया कि धरमपुर की इस भैंस चोरी की घटना का हर हाल में खुलासा होना चाहिए।

एसपी के निर्देशन में धरमपुर पुलिस के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई। इस टास्क फोर्स को तीन टास्क दिए गए:

1.  चोरी गई भैंस की बरामदगी

2.  आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी

3.  इस गिरोह के नेटवर्क का पूरा खुलासा

100 दिन तक कैसे हुआ ऑपरेशन? 3 लेयर में की गई जांच

इस केस को सुलझाना इतना आसान नहीं था। चोरों ने कोई सुराग नहीं छोड़ा था। न तो मौके पर कोई फुटप्रिंट थे और न ही किसी ने चोरों को देखा था। ऐसे में धरमपुर थाना प्रभारी उनि. अनिल सिंह ने 3 लेयर में जांच शुरू की।

पहली लेयर - मुखबिर तंत्र को सक्रिय करना:

पुलिस टीम ने सबसे पहले अपने मुखबिरों को सक्रिय किया। धरमपुर, सरवई, गुनौर और छतरपुर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में ऐसे लोगों पर नजर रखी गई जो पहले पशु चोरी में पकड़े गए हैं या जो पशुओं की खरीद-फरोख्त का काम करते हैं। हर हफ्ते मुखबिरों से मीटिंग की गई। आसपास के सभी पशु बाजारों - बड़ामलहरा, बिजावर, छतरपुर पशु मंडी में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को भेजा गया और चोरी गई भैंस के हुलिए की फोटो दिखाई गई।

दूसरी लेयर - साइबर सेल की तकनीकी सहायता:

 यह इस केस का सबसे अहम मोड़ था। पुलिस ने साइबर सेल पन्ना से तकनीकी सहायता ली। घटना वाली रात हरदी गांव और उसके आसपास के टावरों पर कौन-कौन से मोबाइल नंबर एक्टिव थे, इसकी डिटेल निकाली गई। उनमें से कई नंबर ऐसे थे जो घटना के बाद से बंद थे या लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे।

तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से मिली जानकारी का जब मिलान किया गया तो 4 नाम सामने आए। इन चारों के नाम पहले भी पशु चोरी और लूट के मामलों में आ चुके थे।

तीसरी लेयर - संदिग्धों से पूछताछ:

 पुलिस ने संदिग्धों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की। शुरुआत में वे मुकरते रहे, लेकिन जब पुलिस ने उनके सामने तकनीकी साक्ष्य रखे तो वे टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

ऐसे पकड़े गए 4 आरोपी, छतरपुर से बरामद हुई भैंस

लगातार 100 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली कि चोरी गई भैंस और पड़िया को छतरपुर जिले के ग्राम गौरेया, थाना सिविल लाइन क्षेत्र में बेचा गया है।

पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक टीम छतरपुर रवाना की। वहां ग्राम गौरेया में एक व्यक्ति के घर से चोरी गई भैंस और पड़िया को सकुशल दस्तयाब किया गया। जिस व्यक्ति ने भैंस खरीदी थी, उसने बताया कि इन चारों ने उसे कम दाम में भैंस बेची थी। उसे नहीं पता था कि यह चोरी की है।

भैंस बरामद होने के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपी:

1. आशीष पटेल पिता साकेत बिहारी पटेल, उम्र 19 वर्ष, निवासी ग्राम टेड़ी कबरी, थाना सरवई, जिला छतरपुर।

यह गिरोह का सबसे कम उम्र का सदस्य है, लेकिन सबसे शातिर है। इसका काम रेकी करना होता है।

2. महेंद्र सिंह पटेल पिता श्री रामबोल पटेल, उम्र 26 वर्ष, निवासी ग्राम टेड़ी कबरी, थाना सरवई, जिला छतरपुर। यह गिरोह का सरगना बताया जा रहा है। इसके खिलाफ छतरपुर और पन्ना जिले में पहले से 5 मामले दर्ज हैं।

3. रघुनंदन तिवारी पिता बंशगोपाल तिवारी, उम्र 20 वर्ष, निवासी ग्राम कल्याणपुर, थाना धरमपुर, जिला पन्ना।

 यह स्थानीय होने के कारण गांवों की जानकारी देता था कि किसके घर में अच्छी भैंस है।

4. अंजू लोध पिता देशराज लोध, उम्र 19 वर्ष, निवासी ग्राम दुर्गापुर, थाना धरमपुर, जिला पन्ना।

 इसका काम चोरी की गई भैंस को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और बेचने में मदद करना था।

पुलिस ने इनके खिलाफ धारा 303(2) बीएनएस के तहत कार्रवाई की है। धारा 303(2) में 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। पुलिस अब इनसे अन्य भैंस चोरी की घटनाओं के बारे में भी पूछताछ कर रही है।

बुंदेलखंड में क्यों बढ़ रहा है भैंस चोरी का धंधा?

पन्ना, छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़ जैसे बुंदेलखंड के जिलों में भैंस चोरी एक संगठित अपराध बन गया है। इसके पीछे कई कारण हैं।

एक तो भैंस की कीमत बहुत बढ़ गई है। एक अच्छी मुर्रा नस्ल की भैंस की कीमत 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक है। इसलिए चोरों को इसमें ज्यादा मुनाफा दिखता है।

दूसरा, किसान रात में अपनी भैंस को अक्सर घर के बाहर खुले में बांधते हैं। सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं होता।

तीसरा, चोरी की भैंस को बेचना आसान है। चोर रात में चोरी करके सुबह किसी दूर के पशु बाजार में ले जाकर बेच देते हैं, जहां कोई कागज नहीं मांगा जाता।

पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने धरमपुर के अलावा अजयगढ़ और सरवई क्षेत्र में भी 3 से 4 अन्य चोरियां की हैं, जिनका खुलासा जल्द ही हो सकता है।

किसानों के लिए सबक: अपनी भैंस को चोरी से कैसे बचाएं?

धरमपुर पुलिस ने इस मामले के बाद किसानों के लिए एक एडवाइजरी भी जारी की है।

- अपनी भैंस को रात में घर के अंदर या सुरक्षित बाड़े में बांधें।

- भैंस के गले में घंटी जरूर लगाएं ताकि रात में आवाज आए।

- हो सके तो अपने घर या छानी के पास एक सोलर लाइट और सीसीटीवी कैमरा जरूर लगाएं। आजकल 1500 रुपये में भी कैमरे आ रहे हैं।

- गांव में रात्रि गश्त की व्यवस्था को मजबूत करें।

- अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके गांव में घूमता दिखे और पशुओं के बारे में पूछताछ करे तो तुरंत 100 नंबर या थाने को सूचना दें।

- अपनी भैंस का फोटो और उसकी पहचान का निशान अपने पास रखें।

इस सफलता में इनका रहा सराहनीय योगदान

इस पूरे 100 दिन के ऑपरेशन को सफल बनाने में धरमपुर थाना प्रभारी उनि. अनिल सिंह की भूमिका सबसे अहम रही। उनके साथ सउनि. लखनलाल प्यासी, प्र.आर. जयेंद्र पाल, अशोक प्रजापती, आरक्षक अजीत, वरुण, प्रमोद पाल, देवराज और साइबर सेल टीम पन्ना के आरक्षकों ने दिन-रात मेहनत की।

पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू ने इस पूरी टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

फरियादी बेटू खान ने अपनी भैंस वापस मिलने पर पुलिस का आभार जताया है। उसने कहा कि उसे लगा था कि अब भैंस कभी नहीं मिलेगी, लेकिन धरमपुर पुलिस ने 100 दिन बाद भी उसकी भैंस ढूंढ निकाली।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. धरमपुर में भैंस चोरी की घटना कब हुई थी?

यह घटना 18 जून 2026 की रात को ग्राम हरदी में हुई थी। फरियादी बेटू खान के घर से भैंस और पड़िया चोरी हुई थी।

2. पुलिस ने कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया है?

पुलिस ने इस मामले में 4 आरोपियों - आशीष पटेल, महेंद्र सिंह पटेल, रघुनंदन तिवारी और अंजू लोध को गिरफ्तार किया है।

3. चोरी गई भैंस कहां से बरामद हुई?

चोरी गई भैंस और पड़िया को पुलिस ने छतरपुर जिले के ग्राम गौरेया, थाना सिविल लाइन क्षेत्र से बरामद किया है, जहां आरोपियों ने उसे बेच दिया था।

4. आरोपियों पर कौन सी धारा लगाई गई है?

आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

5. पुलिस ने 100 दिनों में कैसे खुलासा किया?

पुलिस ने सक्रिय मुखबिर तंत्र, साइबर सेल की तकनीकी सहायता और संदिग्धों से लगातार पूछताछ के आधार पर इस गिरोह का पर्दाफाश किया।

Disclaimer: यह समाचार धरमपुर थाना पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट और थाना प्रभारी से प्राप्त जानकारी के आधार पर लिखा गया है। आरोपियों को अभी न्यायालय में पेश किया जाना है और मामला विचाराधीन है।


हमारी टीम का विशेष आभार

संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)



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