बालूपुर में 43 विस्थापित परिवारों को मिलेंगे 7.5 लाख, SDM ने किया निरीक्षण
बालूपुर में विस्थापित परिवारों की नवीन बस्ती का किया निरीक्षण: SDM आलोक मार्को ने दिए बिजली, स्कूल और 7.5 लाख पुनर्वास पर सख्त निर्देश
By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 3 अक्टूबर 2026 | Ajaigarh News
Ajaigarh News: अजयगढ़ पन्ना से से हमारे संवाददाता राजकुमार प्रजापति ने बताया कि पन्ना जिले की बहुप्रतीक्षित मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के अंतर्गत विस्थापित हुए परिवारों के जीवन को पटरी पर लाने के लिए जिला प्रशासन ने अब कमर कस ली है। इसी कड़ी में शनिवार को अजयगढ़ के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) आलोक मार्को ने अपनी राजस्व, पंचायत, विद्युत और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम के साथ ग्राम बालूपुर में बनाई गई विस्थापित परिवारों की नवीन बस्ती का विस्तृत निरीक्षण किया।
यह दौरा महज एक औपचारिकता नहीं था। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस निरीक्षण में SDM ने न केवल बस्ती की मूलभूत सुविधाओं की हकीकत परखी, बल्कि ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाकर उनकी समस्याएं भी सुनीं। निरीक्षण के बाद उन्होंने कई अहम निर्देश जारी किए, जिससे 43 विस्थापित परिवारों में एक नई उम्मीद जगी है।
प्रशासन क्यों है एक्शन मोड में? - मझगांय परियोजना का महत्व
मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना को समझना जरूरी है। पन्ना जिला बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है, जहां पानी की कमी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। मझगांय नदी पर बन रहा यह मध्यम बांध अजयगढ़, गुनौर विकासखंड के लगभग 32 गांवों के लिए वरदान साबित होगा। इस परियोजना के पूरा होने से लगभग 8500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी की फसल में भी पानी मिल सकेगा। साथ ही अजयगढ़ नगर की पेयजल समस्या का भी स्थायी समाधान होगा।
लेकिन इस विकास की कीमत बालूपुर जैसे गांवों के लोगों को चुकानी पड़ी। बांध का डूब क्षेत्र बढ़ने से बालूपुर के 43 परिवारों की कृषि भूमि और आवास डूब में आ गए। मध्य प्रदेश शासन की आदर्श पुनर्वास नीति के तहत इन परिवारों को मुआवजा देकर एक नई जगह पर बसाया गया है। इस नई बस्ती को ही 'बालूपुर नवीन बस्ती' कहा जाता है। शासन ने जमीन के बदले जमीन और मकान के बदले मकान के साथ-साथ पुनर्वास पैकेज देने का प्रावधान किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाएं पहुंचने में समय लगता है। इसी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी थी, जिसकी जानकारी कलेक्टर पन्ना तक पहुंची और उन्होंने तत्काल SDM को मौके पर जाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान क्या-क्या हुआ? - 5 बड़े बिंदुओं पर हुई कार्रवाई
1. विद्युत सप्लाई व्यवस्था - अंधेरे से उजाले की ओर
नवीन बस्ती के लोगों की सबसे बड़ी शिकायत बिजली को लेकर थी। ग्रामीणों ने SDM को बताया कि बस्ती में बिजली के पोल तो लगे हैं, लेकिन कई जगह तार ढीले हैं और एक ही 25 KV के ट्रांसफार्मर पर पूरे 43 परिवारों का लोड है, जिससे वोल्टेज की समस्या बनी रहती है और मोटर पंप नहीं चल पाते। कई बार तो 2-3 दिन तक लाइट नहीं आती।
इस पर SDM आलोक मार्को ने मौके पर मौजूद विद्युत विभाग के सहायक यंत्री को सख्त लहजे में निर्देश दिए। उन्होंने कहा, "पुनर्वास बस्ती में बिजली की कटौती किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" उन्होंने 3 दिन के भीतर दूसरा ट्रांसफार्मर लगाने, सभी लूज तारों को टाइट करने और बस्ती के हर घर में मीटर की जांच कर सुचारू सप्लाई सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय में काम पूरा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
2. शिक्षा और स्वास्थ्य - आंगनवाड़ी और स्कूल के लिए भूमि चिन्हित
दूसरी सबसे बड़ी समस्या बच्चों की शिक्षा की थी। नवीन बस्ती में वर्तमान में न तो आंगनवाड़ी केंद्र है और न ही प्राथमिक विद्यालय। छोटे-छोटे बच्चों को कड़ी धूप में डेढ़ किलोमीटर दूर पुराने बालूपुर गांव के स्कूल में जाना पड़ता है। इससे बच्चों की उपस्थिति कम हो रही है और माताओं को भी परेशानी हो रही है।
इसे गंभीरता से लेते हुए SDM ने राजस्व विभाग के तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी को निर्देशित किया कि नवीन बस्ती के मध्य में ही कम से कम 0.50 एकड़ शासकीय भूमि चिन्हांकित की जाए। इस भूमि पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र और शिक्षा विभाग द्वारा एक प्राथमिक शाला भवन का निर्माण प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। SDM ने कहा कि शासन की मंशा है कि विस्थापित बस्ती में सभी नागरिक सुविधाएं उसी बस्ती के अंदर मिलें, ताकि लोगों को भटकना न पड़े। इस घोषणा के बाद बस्ती की महिलाओं में खुशी का माहौल है।
3. बांध से रिसाव की समस्या - ड्रेनेज निर्माण के निर्देश
यह एक तकनीकी लेकिन बहुत ही गंभीर समस्या है। ग्रामीणों ने बताया कि मझगांय बांध के भरने के बाद उसके निचले हिस्से से पानी का रिसाव होता है, जो सीधे नवीन बस्ती के निचले इलाकों में जमा हो जाता है। इससे घरों में सीलन आ रही है और बरसात में बस्ती में 2-3 फीट तक पानी भरने का खतरा बना रहता है।
इस पर SDM ने जल संसाधन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी को निर्देश दिया कि तत्काल एक तकनीकी दल बनाकर रिसाव स्थल का सर्वेक्षण कराया जाए। उन्होंने कहा कि बस्ती की सुरक्षा के लिए बांध से बस्ती तक एक पक्का ड्रेनेज चैनल और बस्ती के चारों ओर नाली निर्माण का कार्य अगले 10 दिनों में शुरू कराया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि ड्रेनेज का पानी किसी किसान के खेत में न जाए, बल्कि उसे प्राकृतिक नाले से जोड़ा जाए।
4. साढ़े 7 लाख की विशेष पुनर्वास राशि - पारदर्शिता के साथ वितरण
यह इस पूरे निरीक्षण का सबसे अहम और संवेदनशील मुद्दा था। मध्य प्रदेश शासन की मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की पुनर्वास नीति के अनुसार, जिन परिवारों की पूरी कृषि भूमि डूब में चली गई है, उन्हें मानक मुआवजे के अलावा 7 लाख 50 हजार रुपये की अतिरिक्त विशेष पुनर्वास सहायता राशि दी जाती है। यह राशि परिवार को नए सिरे से जीवन शुरू करने, रोजगार स्थापित करने और घर बनाने के लिए दी जाती है।
बालूपुर के 43 परिवारों के लिए यह राशि स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन बैंक खातों में त्रुटि और सहमति पत्र न होने के कारण भुगतान अटका हुआ था। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए SDM आलोक मार्को ने गांव की चौपाल पर ही पूरी 43 हितग्राहियों की सूची का सार्वजनिक वाचन किया। उन्होंने एक-एक नाम पुकारा और ग्रामीणों से पुष्टि कराई।
उन्होंने बताया कि यह राशि DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में जाएगी। इसके लिए आवश्यक है कि - (1) परिवार के सभी वयस्क सदस्यों का संयुक्त सहमति पत्र, (2) आधार कार्ड, (3) बैंक पासबुक जिसमें पति-पत्नी का संयुक्त खाता हो, ये दस्तावेज पंचायत सचिव और रोजगार सहायक को देने होंगे। उन्होंने पंचायत सचिव को निर्देश दिया कि वह 3 दिनों के भीतर शिविर लगाकर सभी 43 परिवारों के दस्तावेज पूर्ण कराए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी बिचौलिए की कोई भूमिका नहीं होगी, पूरा पैसा सीधे खाते में आएगा। सूची के वाचन के बाद ग्रामीणों ने तालियां बजाकर प्रशासन का धन्यवाद किया।
5. अन्य मूलभूत सुविधाएं - पेयजल और रोजगार
निरीक्षण के अंत में SDM ने पेयजल व्यवस्था भी देखी। बस्ती में 2 हैंडपंप लगे हैं, जिनमें से एक खराब है। उन्होंने PHE विभाग को उसे 24 घंटे में ठीक करने और एक नया सोलर आधारित नल-जल योजना का प्रस्ताव बनाने को कहा। साथ ही उन्होंने रोजगार सहायक को निर्देश दिया कि सभी विस्थापित परिवारों को मनरेगा में 100 दिन का रोजगार बस्ती के अंदर ही उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें बाहर न जाना पड़े।
क्या है मध्य प्रदेश की पुनर्वास नीति?
मध्य प्रदेश शासन की पुनर्वास नीति देश में सबसे बेहतर नीतियों में से एक मानी जाती है। इसके तहत विस्थापित परिवार को केवल जमीन का मुआवजा नहीं, बल्कि 5 प्रकार की सहायता दी जाती है - (a) आवासीय भूखंड, (b) मकान निर्माण अनुदान, (c) कृषि भूमि के बदले भूमि या 7.5 लाख रुपये तक का विशेष पैकेज, (d) रोजगार के लिए अनुदान, (e) बस्ती में सभी मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन। बालूपुर में इसी नीति का क्रियान्वयन हो रहा है।
निष्कर्ष: विकास के साथ मानवता का संगम
कुल मिलाकर, बालूपुर नवीन बस्ती का यह निरीक्षण एक सकारात्मक कदम है। यह दर्शाता है कि जिला प्रशासन केवल बांध बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विस्थापितों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। SDM आलोक मार्को द्वारा मौके पर ही लिए गए फैसले, खासकर 7.5 लाख रुपये की राशि का सार्वजनिक वाचन और बिजली-पानी-स्कूल जैसी समस्याओं का त्वरित निराकरण, लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाता है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग कितनी जल्दी इन निर्देशों का पालन करते हैं। प्रशासन ने सभी विभागों से 7 दिन के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। यदि सभी काम समय पर पूरे होते हैं, तो बालूपुर नवीन बस्ती पन्ना जिले में पुनर्वास का एक आदर्श उदाहरण बन सकती है, जहां विस्थापन अभिशाप नहीं, बल्कि विकास में भागीदारी का एक नया अवसर बनकर सामने आएगा।
ग्राउंड जीरो पर अधिकारियों की मौजूदगी
इस निरीक्षण के दौरान SDM आलोक मार्को के साथ तहसीलदार अजयगढ़, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जल संसाधन विभाग के SDO, विद्युत विभाग के सहायक यंत्री, महिला बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक, राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी, ग्राम पंचायत बालूपुर के सचिव, सरपंच और रोजगार सहायक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी विभागों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी समझी और मौके पर ही नोट्स लिए। SDM ने कहा कि अब हर 15 दिन में इस बस्ती की समीक्षा बैठक होगी और इसकी रिपोर्ट सीधे कलेक्टर कार्यालय को भेजी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी काम कागजों में न अटके।
विस्थापित परिवारों के लिए आगे की राह
बालूपुर के विस्थापित परिवारों के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है। लंबे समय से वे अपने हक के लिए इंतजार कर रहे थे। शासन ने जो 7.5 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है, उससे वे अपने लिए स्थायी रोजगार जैसे दुकान, डेयरी, कृषि यंत्र या छोटे व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। SDM ने ग्रामीणों को समझाया कि इस राशि का उपयोग सोच-समझकर करें और किसी भी लालच में आकर इसे गलत हाथों में न दें। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी परिवार को बैंक से लोन लेने में परेशानी आती है तो प्रशासन उनकी मदद करेगा। इसके अलावा जो परिवार अभी तक पात्रता सूची में छूट गए हैं, वे भी अपने दस्तावेज के साथ SDM कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं, उनकी भी जांच कराई जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि मझगांय परियोजना के कारण एक भी पात्र परिवार सुविधाओं से वंचित न रहे। यही असली पुनर्वास है।
अजयगढ़ पन्ना से हमारे संवाददाता राजकुमार प्रजापति की खास रिपोर्ट।
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)


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