धरमपुर में मनाया गया वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह, रेंजर मनोज सिंह बघेल ने दिया वन संरक्षण का संदेश
वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह के तहत धरमपुर में जागरूकता कार्यक्रम, वन संरक्षण का दिया संदेश।
By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 3 अक्टूबर 2026 | Ajaigarh News
Ajaigarh News: अजयगढ़ पन्ना से राजकुमार प्रजापति ने बताया की वन्य प्राणियों और हमारी अमूल्य वन संपदा के संरक्षण के लिए पूरे देश में 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में पन्ना जिले के वन परिक्षेत्र धरमपुर में शनिवार को एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम धरमपुर के प्रसिद्ध खनियां के मंदिर प्रांगण में आयोजित किया गया, जहां वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती मनाकर की गई। दोनों महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद वन विभाग ने वन्य प्राणी सुरक्षा और वन संरक्षण को लेकर एक विस्तृत जागरूकता अभियान चलाया। कार्यक्रम के अंत में मंदिर प्रांगण, आसपास के क्षेत्र और स्टाफ डेम के पास स्वच्छता अभियान भी चलाया गया, जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
क्यों मनाया जाता है वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह? जानिए इसका इतिहास
वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह मनाने की शुरुआत 1955 में हुई थी। भारत में वन्य जीवों की घटती संख्या और जंगलों के कटने को लेकर चिंता बढ़ रही थी। तब इंडियन बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ ने यह तय किया कि हर साल 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह मनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों को जंगल और जानवरों के महत्व के बारे में बताना है।
2 अक्टूबर को गांधी जयंती का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि महात्मा गांधी जी हमेशा प्रकृति और जीवों से प्रेम करने की बात कहते थे। उनका मानना था कि धरती पर सभी जीवों को जीने का बराबर अधिकार है। इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए इस पूरे सप्ताह में देशभर के जंगलों, स्कूलों, गांवों और शहरों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
पन्ना जिले के लिए यह सप्ताह और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि पन्ना टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के सबसे महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्यों में से एक है। धरमपुर वन परिक्षेत्र इसी टाइगर रिजर्व के बफर जोन के करीब आता है। यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल, नीलगाय जैसे कई वन्य प्राणी पाए जाते हैं। इसलिए यहां के लोगों में वन्य प्राणी सुरक्षा को लेकर जागरूकता होना बहुत जरूरी है।
धरमपुर में कैसे मनाया गया कार्यक्रम - खनियां मंदिर बना जागरूकता का केंद्र
धरमपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारियों ने इस बार कार्यक्रम के लिए खनियां के मंदिर को चुना। यह मंदिर धरमपुर क्षेत्र का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां रोजाना सैकड़ों लोग दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के पास ही जंगल शुरू हो जाता है, इसलिए यहां जागरूकता कार्यक्रम करना सबसे सही फैसला था।
शनिवार सुबह 11 बजे कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सबसे पहले वन परिक्षेत्र अधिकारी धरमपुर रेंजर मनोज सिंह बघेल और उनकी टीम ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्रों पर फूल-माला चढ़ाकर उन्हें याद किया। रेंजर मनोज सिंह बघेल ने बताया कि गांधी जी ने हमेशा स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण की बात कही थी और शास्त्री जी ने 'जय जवान जय किसान' का नारा देकर देश को आत्मनिर्भर बनाया। दोनों महापुरुषों के विचार आज भी वन संरक्षण के लिए प्रेरणा देते हैं।
इसके बाद वन संरक्षण पर चर्चा शुरू हुई। वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि जंगल सिर्फ लकड़ी का स्रोत नहीं है, बल्कि यह हमारा जीवन है। जंगल से हमें ऑक्सीजन मिलती है, बारिश होती है, जमीन का कटाव रुकता है और हजारों वन्य प्राणियों को घर मिलता है। यदि जंगल खत्म हो जाएंगे तो हमारा जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा।
अधिकारियों ने क्या कहा - जंगल और जानवर हमारी प्राकृतिक संपदा
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने ग्रामीणों को बहुत ही सरल भाषा में वन्य जीवों के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि जंगल और वन्य प्राणी हमारी प्राकृतिक संपदा हैं, जैसे हमारे पास सोना-चांदी होता है, वैसे ही ये जानवर और जंगल हमारी असली दौलत हैं। इनकी रक्षा करना सिर्फ वन विभाग का काम नहीं है, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
रेंजर मनोज सिंह बघेल ने कहा, "पन्ना टाइगर रिजर्व में कुछ साल पहले बाघों की संख्या शून्य हो गई थी। सरकार और वन विभाग के अथक प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज यहां फिर से 70 से ज्यादा बाघ हैं। यह इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि यदि हम चाहें तो विलुप्त हो रहे जानवरों को फिर से बचा सकते हैं। लेकिन यह तभी संभव है जब गांव के लोग हमारा साथ दें।"
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जंगल में शिकार न करें। कई बार लोग छोटे-मोटे लालच में फंसकर जंगली जानवरों का शिकार कर लेते हैं, जो वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत एक गंभीर अपराध है। इसमें 3 से 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि यदि गांव में कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से लकड़ी काटता है, जंगल में आग लगाता है या जानवरों का शिकार करता है तो उसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा।
पर्यावरण संतुलन और मानव-वन्य जीव संघर्ष पर चर्चा
कार्यक्रम में पर्यावरण संतुलन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि जंगल में हर जानवर की एक भूमिका होती है। बाघ और तेंदुआ जैसे मांसाहारी जानवर हिरण और नीलगाय की संख्या को नियंत्रित रखते हैं। यदि हिरणों की संख्या बढ़ गई तो वे किसानों की पूरी फसल खा जाएंगे। इसी तरह गिद्ध और सियार जैसे जानवर मरे हुए जानवरों को खाकर जंगल को साफ रखते हैं और बीमारियों को फैलने से रोकते हैं।
आजकल मानव और वन्य जीवों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है। कई बार तेंदुआ या भालू गांव में आ जाता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को क्या करना चाहिए, इस पर भी जानकारी दी गई। वन विभाग ने कहा कि यदि गांव के आसपास कोई जंगली जानवर दिखे तो उसे मारने या भगाने की कोशिश न करें। तुरंत वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना दें। टीम आकर जानवर को सुरक्षित रूप से पकड़कर वापस जंगल में छोड़ देगी।
साथ ही किसानों को सलाह दी गई कि वे अपने खेतों के आसपास बाड़ लगाएं, रात में अकेले जंगल की तरफ न जाएं और अपने मवेशियों को खुले में न छोड़ें। वन विभाग ने बताया कि यदि किसी ग्रामीण की फसल को जंगली जानवर नुकसान पहुंचाते हैं या किसी मवेशी को मार देते हैं तो सरकार द्वारा उसका मुआवजा भी दिया जाता है। इसके लिए तत्काल वन विभाग को आवेदन देना होता है।
मंदिर प्रांगण और स्टाफ डेम के पास चला स्वच्छता अभियान
जागरूकता कार्यक्रम के बाद गांधी जयंती के उपलक्ष्य में स्वच्छता अभियान चलाया गया। वन विभाग के कर्मचारियों, वन समिति के सदस्यों और स्थानीय युवाओं ने मिलकर खनियां मंदिर के पूरे प्रांगण की सफाई की। मंदिर के आसपास पड़ी पॉलिथीन, प्लास्टिक की बोतलें और कचरा इकट्ठा कर उसे सही जगह पर निपटाया गया।
इसके बाद सभी लोग स्टाफ डेम के पास पहुंचे। स्टाफ डेम धरमपुर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है, जहां जंगली जानवर पानी पीने आते हैं। यहां भी लोगों ने सफाई की और ग्रामीणों को समझाया कि जल स्रोतों के पास कचरा न फेंके। गंदे पानी से जानवर बीमार हो जाते हैं और कई बार उनकी मौत भी हो जाती है। स्वच्छता अभियान में बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में कौन-कौन रहा मौजूद
इस जागरूकता कार्यक्रम में वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। वन परिक्षेत्र धरमपुर के रेंजर मनोज सिंह बघेल के अलावा वन समिति के अध्यक्ष, तेंदूपत्ता समिति के प्रबंधक, फड़ मुंशी, समाजसेवी, पर्यावरणविद और बड़ी संख्या में वन स्टाफ मौजूद रहा। स्थानीय सरपंच, जनपद सदस्य और ग्रामीण भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
वन समिति के अध्यक्ष ने कहा कि वे हमेशा वन विभाग के साथ हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जंगल को अपना परिवार समझें। तेंदूपत्ता समिति के प्रबंधक ने बताया कि जंगल से ही हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। तेंदूपत्ता, महुआ, आंवला जैसे कई वनोपज से ग्रामीणों की आजीविका चलती है, इसलिए जंगल को बचाना हमारी रोजी-रोटी को बचाना है।
पन्ना टाइगर रिजर्व और धरमपुर का महत्व
पन्ना टाइगर रिजर्व को यूनेस्को ने बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किया हुआ है। धरमपुर परिक्षेत्र इस रिजर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां सागौन, महुआ, तेंदू, बांस जैसे कीमती पेड़ पाए जाते हैं। साथ ही यहां कई दुर्लभ औषधीय पौधे भी मिलते हैं। वन विभाग द्वारा यहां लगातार पौधारोपण किया जा रहा है।
पिछले कुछ सालों में पन्ना में पर्यटन भी बढ़ा है। देश-विदेश से लोग बाघ देखने के लिए पन्ना आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को होटल, गाइड और जिप्सी के माध्यम से रोजगार मिलता है। यदि जंगल और जानवर सुरक्षित रहेंगे तो पर्यटन बढ़ेगा और गांव के युवाओं को रोजगार मिलेगा।
निष्कर्ष - सबको मिलकर बचाना होगा जंगल
धरमपुर में आयोजित यह वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह का कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि लोगों को प्रकृति से जोड़ने का एक प्रयास था। कार्यक्रम के अंत में सभी ने शपथ ली कि वे जंगल और जानवरों की रक्षा करेंगे, पेड़-पौधे लगाएंगे, प्लास्टिक का उपयोग कम करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे।
वन विभाग ने बताया कि यह जागरूकता अभियान पूरे सप्ताह जारी रहेगा। अलग-अलग गांवों में नुक्कड़ नाटक, स्कूलों में चित्रकला प्रतियोगिता और दीवार लेखन के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। यदि हम आज अपने जंगलों और जानवरों को नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढ़ियों को हम सिर्फ एक बंजर धरती देकर जाएंगे। इसलिए जरूरी है कि हम सब मिलकर इस प्राकृतिक संपदा को बचाएं।
अजयगढ़ से राजकुमार प्रजापति की ख़ास रिपोर्ट।
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)

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