अजयगढ़ में रात के अंधेरे में लकड़ी चोरी, वन विभाग ने ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की, आरोपी ने कबूला जुर्म
रात के अंधेरे में जंगल से लकड़ी चोरी की कोशिश नाकाम, अजयगढ़ में वन विभाग ने ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत अवैध सागौन की बल्लियां जब्त कीं - आरोपी ने कबूला जुर्म
By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 5 अक्टूबर 2026 | Ajaigarh News
Ajaigarh News: अजयगढ़ पन्ना से हमारे संवाददाता राजकुमार प्रजापति ने बताया कि पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील में वन अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब लकड़ी तस्कर दिन के उजाले की जगह रात के अंधेरे में जंगलों में घुसकर पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। लेकिन उत्तर वनमंडल पन्ना के सतर्क वन अमले ने ऐसी ही एक कोशिश को नाकाम कर दिया है। वन परिक्षेत्र धरमपुर के अंतर्गत आने वाले दिविहा गांव के जंगल में रात के समय अवैध रूप से लकड़ी काटने पहुंची एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को वन विभाग ने जब्त कर लिया है। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध कटाई करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।
यह पूरी घटना बीते दो दिनों की है, जब उत्तर वनमंडलाधिकारी पन्ना के निर्देश पर पूरे वनमंडल में अवैध कटाई, अवैध उत्खनन और वन्य जीव अपराधों के विरुद्ध विशेष रात्रि गश्ती अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत धरमपुर परिक्षेत्र की टीम को यह बड़ी सफलता मिली है।
कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा?
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना रात करीब 10 से 11 बजे के बीच की है। वन परिक्षेत्र अधिकारी धरमपुर मनोज सिंह बघेल के नेतृत्व में वनरक्षक आनंद सिंह, उमंग खरे, रामखगेश पटेल, हेमराज अहिरवार, शिवचरण प्रजापति और महेन्द्र साहू की टीम बीट धरमपुर के दिविहा हार क्षेत्र में रात्रि गश्त पर थी।
गश्त के दौरान टीम को दिविहा गांव की तरफ से जंगल के अंदर से ट्रैक्टर-ट्रॉली के चलने की आवाज सुनाई दी। रात के सन्नाटे में यह आवाज साफ तौर पर सुनाई दे रही थी। वन अमले को संदेह हुआ कि कोई अवैध रूप से जंगल में प्रवेश कर रहा है। टीम ने तुरंत टॉर्च की रोशनी से उस दिशा में तलाश शुरू की।
जैसे ही टॉर्च की रोशनी जंगल के अंदर पहुंची, वहां पहले से मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। जब वन अमला मौके पर पहुंचा तो वहां ट्रैक्टर-ट्रॉली तो नहीं मिली, लेकिन मौके पर ताजा कटी हुई सतकट्ठा प्रजाति की लकड़ी की बल्लियां पड़ी हुई मिलीं। इससे यह स्पष्ट हो गया था कि कुछ ही देर पहले यहां पेड़ों की अवैध कटाई की गई है और आरोपी वन कर्मियों को देखकर भाग गए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन अमले ने रात में ही एक अन्य ट्रैक्टर की मदद से मौके पर पड़ी सभी अवैध लकड़ियों को जब्त कर सुरक्षित रूप से वन चौकी प्यारी पहुंचाया। रात में ही पंचनामा तैयार किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को इस घटना की सूचना दी गई।
सुबह फिर हुई सर्चिंग, झाड़ियों में छिपी मिली ट्रैक्टर-ट्रॉली
वन विभाग ने केवल लकड़ी जब्त कर मामले को खत्म नहीं किया। सुबह होते ही वन परिक्षेत्र अधिकारी ने टीम को दोबारा उसी स्थान पर सघन तलाशी के लिए भेजा। सुबह करीब 6 बजे से शुरू हुई सर्चिंग के दौरान जंगल से कुछ ही दूरी पर घनी झाड़ियों के अंदर एक स्वराज कंपनी की ट्रैक्टर-ट्रॉली छिपी हुई अवस्था में खड़ी मिली।
ट्रॉली खाली थी और मौके पर कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था। ट्रैक्टर को देखकर यह अंदाजा लगाया गया कि रात में आरोपी टॉर्च की रोशनी देखकर ट्रैक्टर-ट्रॉली को वहीं झाड़ियों में छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए थे। वन अमले ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को अपने कब्जे में लिया और उसके रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य पहचान के आधार पर उसके मालिक की जानकारी जुटानी शुरू की।
आसपास के ग्रामीणों और मुखबिरों से पूछताछ करने पर ट्रैक्टर की पहचान दिविहा गांव निवासी रामशरण पिता बाबूलाल कुशवाहा के रूप में हुई। पहचान सुनिश्चित होने के बाद वन विभाग ने रामशरण को पूछताछ के लिए वन चौकी प्यारी बुलाया।
पूछताछ में आरोपी ने कबूला अपना जुर्म
शुरुआत में आरोपी ने वन विभाग को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब उसे जब्त की गई लकड़ी और झाड़ियों से बरामद ट्रैक्टर-ट्रॉली के बारे में सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया और उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार आरोपी रामशरण ने पूछताछ में बताया कि वह एक दिन पहले अपने भाई राम लखन कुशवाहा के साथ बीट धरमपुर के दिविहा हार के जंगल में गया था। वहां उसने सेंटरिंग के काम के लिए सतकट्ठा प्रजाति के पेड़ों की कटाई की थी। सतकट्ठा की लकड़ी सेंटरिंग और मकान निर्माण में काफी मजबूत मानी जाती है, इसलिए अवैध बाजार में इसकी काफी मांग है।
पेड़ काटने के बाद वह लकड़ी को रात में ही ठिकाने लगाने के लिए अपने भाई के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर जंगल पहुंचा था। वह लकड़ी को लोड कर ही रहा था कि उसे जंगल में टॉर्च की रोशनी और वन अमले के आने का अहसास हुआ। पकड़े जाने के डर से वह ट्रैक्टर-ट्रॉली को वहीं झाड़ियों में छिपाकर अपने घर भाग गया था।
आरोपी के बयान के आधार पर वन विभाग ने वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी के भाई की भी इस अपराध में संलिप्तता पाई गई है, जिसके चलते उसकी भी तलाश की जा रही है।
क्या है सतकट्ठा लकड़ी और क्यों होती है इसकी चोरी?
पन्ना के जंगलों में सतकट्ठा, जिसे कई जगहों पर साजा या साज के नाम से भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण इमारती लकड़ी है। यह लकड़ी काफी मजबूत और टिकाऊ होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका उपयोग मुख्य रूप से मकान की सेंटरिंग, दरवाजे की चौखट और कृषि औजार बनाने में किया जाता है। बाजार में इसकी कीमत 800 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक होती है, जिसके कारण कुछ लोग वन विभाग की अनुमति के बिना ही इसकी अवैध कटाई कर लेते हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक पेड़ को बड़ा होने में 20 से 30 साल लग जाते हैं, लेकिन तस्कर उसे कुछ ही मिनटों में काट देते हैं। इससे न केवल वन संपदा को नुकसान होता है बल्कि वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को भी खतरा पहुंचता है। पन्ना का यह क्षेत्र टाइगर रिजर्व से लगा हुआ है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पूरे इकोसिस्टम के लिए नुकसानदायक है।
वन अपराध में क्या है सजा का प्रावधान?
मध्य प्रदेश वन अधिनियम के तहत जंगल से अवैध रूप से लकड़ी काटना एक गंभीर अपराध है। इस मामले में वन अपराध प्रकरण (POR) दर्ज किया जाता है।
1. भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 और 33 के तहत दोषी पाए जाने पर 6 महीने से लेकर 2 साल तक की जेल और 5000 रुपये से अधिक का जुर्माना हो सकता है।
2. यदि लकड़ी की कीमत अधिक है या बार-बार अपराध किया गया है तो वन विभाग ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे वाहनों को राजसात (सरकार के पक्ष में जब्त) करने की कार्रवाई भी करता है।
3. आरोपी को वन न्यायालय में पेश किया जाता है, जहां से उसे जमानत लेनी पड़ती है।
इस मामले में भी वन विभाग ने लकड़ी के साथ-साथ अपराध में प्रयुक्त स्वराज ट्रैक्टर-ट्रॉली को भी जब्त कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वाहन राजसात की कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा।
उत्तर वनमंडल पन्ना की लगातार कार्रवाई
उत्तर वनमंडल पन्ना के डीएफओ ने हाल ही में सभी परिक्षेत्र अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि मानसून के बाद जब ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य तेज होते हैं तो अवैध कटाई की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। इसलिए प्रत्येक परिक्षेत्र में रात्रि गश्ती को बढ़ाया जाए और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया जाए।
इसी के परिणामस्वरूप पिछले एक महीने में धरमपुर, अजयगढ़ और पन्ना परिक्षेत्र में अवैध लकड़ी परिवहन के 6 से अधिक मामले पकड़े जा चुके हैं। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
वन परिक्षेत्र अधिकारी मनोज सिंह बघेल ने बताया, "हमें लगातार सूचना मिल रही थी कि दिविहा क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा अवैध कटाई की जा रही है। इसी आधार पर हमने रात्रि गश्ती तेज की थी। आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। हमने नियमानुसार कार्रवाई की है। जंगल हम सभी की संपत्ति है, इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।"
ग्रामीणों से वन विभाग की अपील
वन विभाग ने इस घटना के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने निजी उपयोग के लिए लकड़ी की आवश्यकता है तो वे वैध तरीके से वन विभाग से अनुमति लेकर ही लकड़ी प्राप्त करें। बिना अनुमति के जंगल से लकड़ी काटना अपराध है और पकड़े जाने पर भारी जुर्माना और जेल हो सकती है।
साथ ही विभाग ने लोगों से यह भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से पेड़ काटता है या जंगल से लकड़ी चोरी करता है तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी वन चौकी या वन परिक्षेत्र अधिकारी को दें। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।
फिलहाल वन विभाग ने जब्त की गई लकड़ी और ट्रैक्टर-ट्रॉली को वन चौकी प्यारी में सुरक्षित रखा है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र में अवैध कटाई करने वालों में दहशत का माहौल है।
अजयगढ़ पन्ना से हमारे संवाददाता राजकुमार प्रजापति की खास रिपोर्ट।
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)

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