कमिश्नर ने की मझगांव, रूंझ और केन-बेतवा परियोजना के पुनर्वास कार्यों की समीक्षा, एक सप्ताह में मुआवजा वितरण के निर्देश


पन्ना कलेक्ट्रेट में सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा करते कमिश्नर दिलीप कुमार


पन्ना में कमिश्नर दिलीप कुमार का बड़ा एक्शन: केन-बेतवा लिंक सहित रूंझ और मझगांव परियोजना के विस्थापितों को एक सप्ताह में मुआवजा, जनप्रतिनिधियों से बंटेंगे स्वीकृति पत्र - पूरी समीक्षा बैठक की ग्राउंड रिपोर्ट

By - ब्यूरो रिपोर्ट, सागर संभाग | 1 अक्टूबर 2026 | Panna News

Panna News: पन्ना से हमारे संवाददाता राजकुमार प्रजापति ने बताया कि सागर संभाग के कमिश्नर दिलीप कुमार ने गुरुवार को पन्ना प्रवास के दौरान जिले की तीन सबसे बड़ी और संवेदनशील सिंचाई परियोजनाओं - केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंझ मध्यम सिंचाई परियोजना और मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना के पुनर्वास और मुआवजा वितरण कार्यों की गहन समीक्षा की। कलेक्टर कार्यालय के सभागार में हुई इस हाईलेवल बैठक में उन्होंने दो टूक कहा कि अब फाइलों में नहीं, जमीन पर काम दिखना चाहिए। अगले एक सप्ताह के अंदर सभी लंबित मुआवजा और अतिरिक्त मुआवजा के प्रकरण तैयार कर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र बांटे जाएं।

इस महत्वपूर्ण बैठक में पुलिस महानिरीक्षक सागर जोन इरशाद वली, उप पुलिस महानिरीक्षक छतरपुर रेंज विजय कुमार खत्री, कलेक्टर ऊषा परमार, पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी और अपर कलेक्टर मधुवंतराव धुर्वे सहित राजस्व, जल संसाधन, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कमिश्नर के इस दौरे को मझगांव में चल रहे चिता आंदोलन और विस्थापितों की नाराजगी के बाद बेहद अहम माना जा रहा है। प्रशासन पर लगातार यह आरोप लग रहा था कि विस्थापन के बाद पुनर्वास अधूरा है। इसी पृष्ठभूमि में कमिश्नर ने न सिर्फ समीक्षा की, बल्कि कई बड़े और ठोस निर्देश भी दिए हैं।

बैठक में क्या-क्या हुआ? 5 बड़े निर्देश जो कमिश्नर ने दिए

कमिश्नर दिलीप कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि विस्थापित परिवारों को अब और नहीं भटकाया जाएगा। उन्होंने 5 सबसे बड़े निर्देश दिए हैं, जो अगले 7 दिनों में जमीन पर दिखने चाहिए।

पहला निर्देश - एक सप्ताह में मुआवजा वितरण: कमिश्नर ने राजस्व और जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया कि केन-बेतवा, रूंझ और मझगांव परियोजना के तहत जितने भी मुआवजा और अतिरिक्त मुआवजे के प्रकरण लंबित हैं, उन्हें अगले 7 दिनों में तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वीकृति पत्रों का वितरण किसी अधिकारी के कमरे में नहीं, बल्कि गांव में जनप्रतिनिधियों - सरपंच, जनपद सदस्य और विधायक के माध्यम से किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

दूसरा निर्देश - नई बसाहट में बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य:

विस्थापित परिवारों को जिन नई जगहों पर बसाया गया है, वहां बिजली, पेयजल, सड़क, आंगनवाड़ी और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि अगर परिवार अलग-अलग सेटल हो रहे हैं तो भी उन्हें सुविधा मिलनी चाहिए और अगर सामूहिक रूप से बस रहे हैं तो वहां आरईएस, पीएचई और विद्युत विभाग मिलकर काम करें।

तीसरा निर्देश - सचिव, पटवारी खुद जाएंगे गांव:

कमिश्नर ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि ग्रामीणों को दस्तावेजों के लिए तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सचिव, रोजगार सहायक और पटवारी खुद ग्रामीणों से संपर्क करेंगे, उनके घर जाकर दस्तावेजों का परीक्षण करेंगे। किसी भी स्थिति में प्रभावित परिवार को अनावश्यक रूप से नहीं भटकना पड़े।

चौथा निर्देश - पात्र-अपात्र सूची का गांव में वाचन:

राशि वितरण के दौरान पारदर्शिता के लिए पात्र और अपात्र दोनों सूचियों का गांव के चौपाल पर वाचन किया जाए। नियत स्थान - पंचायत भवन पर सूची चस्पा की जाए और अपात्र लोगों को अपात्र होने का स्पष्ट कारण बताया जाए ताकि भ्रम की स्थिति न रहे।

पांचवां निर्देश - रोजगार से जोड़ने की योजना:

सिर्फ मुआवजा देना ही काफी नहीं है। विस्थापित परिवारों को स्थायी रोजगार से जोड़ना भी जरूरी है। इसके लिए हर परिवार का रोजगार प्रकरण तैयार किया जाए। ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं के स्व-सहायता समूह बनाए जाएं ताकि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 5 अक्टूबर से लगेंगे विशेष शिविर

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है और यह पन्ना जिले के लिए सबसे संवेदनशील परियोजना है। इस परियोजना से सबसे ज्यादा परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

कमिश्नर ने इसके लिए एक विशेष कार्ययोजना बनाई है। आगामी 5 अक्टूबर से क्रमशः तारा, अहिरगुआं, पटी बजरिया, झरकुआं, उड़ला और रामपुर आदि गांवों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे।

इन शिविरों में क्या होगा?

- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, आरईएस, पीएचई, आदिम जाति कल्याण, पशुपालन, विद्युत, महिला एवं बाल विकास विभाग की पूरी टीम एक साथ गांव में मौजूद रहेगी।
- संबंधित विभागों के जिला अधिकारी खुद गांव का भ्रमण करेंगे।
- राजस्व विभाग जमीन के दस्तावेजों का मौके पर ही निराकरण करेगा।
- इसके बाद बैंक की टीम भी गांव में शिविर लगाएगी ताकि मुआवजा राशि सीधे खातों में जा सके और बैंक खाते से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो सके।
- विद्यालय की दाखिला पंजी के आधार पर बच्चों की पात्रता का परीक्षण किया जाएगा ताकि छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं का लाभ मिल सके।

यह एक तरह का प्रशासन गांव की ओर अभियान होगा।

मझगांव, रूंझ और कुंवरपुर के लिए अलग प्लान

कमिश्नर ने मझगांव और रूंझ सिंचाई परियोजना की समीक्षा के दौरान पाया कि कई गांवों में अभी भी बैंक खातों और मूलभूत सुविधाओं का आकलन नहीं हुआ है।

इसके लिए उन्होंने 3 और 4 अक्टूबर को विशेष दल भेजने के निर्देश दिए हैं। 3 अक्टूबर को मझगांव और बालूपुर में और 4 अक्टूबर को कुंवरपुर में विभागीय दल पहुंचेगा।
सागर कमिश्नर दिलीप कुमार ने पन्ना में

यह दल तीन काम करेगा:

1.  हर परिवार के बैंक खाते की जानकारी लेगा और आधार लिंकिंग की समस्या को दूर करेगा।
2.  गांव में बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं का भौतिक सत्यापन करेगा।
3.  सरपंच-सचिव के माध्यम से लोगों को राशि वितरण की तारीख की जानकारी देगा और उन्हें रोजगार गतिविधियों से जोड़ने के लिए समझाइश देगा।

मझगांव, कुंवरपुर और बनहरीकला में जल संसाधन विभाग की पूरी टीम को अगले एक सप्ताह तक कैंप करके काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भी निर्देश दिया गया है कि इन गांवों में मोबाइल हेल्थ यूनिट भेजी जाए और लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयां बांटी जाएं।

सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा में भी सख्त हुए कमिश्नर

पन्ना प्रवास के दौरान कमिश्नर दिलीप कुमार कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी के वीसी कक्ष में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में आयोजित सीएम हेल्पलाइन की वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी शामिल हुए।

मुख्य सचिव द्वारा सागर संभाग के सागर, छतरपुर, दमोह सहित 15 जिलों की सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की समीक्षा की गई। इस दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि भू-अर्जन के प्रकरणों में समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। बड़ी परियोजनाओं के भू-अर्जन के मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाए।

कमिश्नर ने इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शिकायतों का खुद परीक्षण करें और शिकायतकर्ता से सीधे संवाद करें। गलत शिकायतों को विधिवत क्लोज करें और लापरवाह लोक सेवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वर्तमान में चल रहे मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत नल-जल परियोजनाओं के हैंडओवर के काम को भी तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए।

क्यों अहम है कमिश्नर का यह दौरा? जानिए पृष्ठभूमि

पिछले कुछ दिनों से मझगांव डैम से प्रभावित ग्रामीण चिता आंदोलन कर रहे थे। उनका आरोप था कि मुआवजा राशि नहीं मिली और पुनर्वास अधूरा है। इस आंदोलन के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया था।

ऐसे में कमिश्नर का यह दौरा दोहरी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक तरफ पुलिस प्रशासन के माध्यम से कानून-व्यवस्था बनाए रखना और दूसरी तरफ राजस्व और विकास विभाग के माध्यम से ग्रामीणों की मूल समस्याओं का समाधान करना।

बैठक में आईजी और डीआईजी की मौजूदगी भी इसी बात का संकेत देती है कि शासन इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रहा है। अब देखना यह होगा कि अगले एक सप्ताह में जमीन पर कितना काम होता है।

निष्कर्ष: अब वादे नहीं, काम चाहिए

कमिश्नर दिलीप कुमार ने साफ कर दिया है कि अब फाइलों में अटके रहने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने अभियान मोड में काम करने के निर्देश दिए हैं। अगर उनके निर्देशों का पालन होता है तो निश्चित रूप से मझगांव, रूंझ और केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

लेकिन असली परीक्षा 5 अक्टूबर से शुरू होने वाले शिविरों में होगी। क्या अधिकारी सच में गांव-गांव जाएंगे? क्या पात्र-अपात्र सूची का वाचन होगा? क्या महिलाओं के स्व-सहायता समूह बनेंगे? इन सवालों के जवाब अगले 10 दिनों में मिल जाएंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. कमिश्नर ने मुआवजा वितरण के लिए क्या समय-सीमा दी है?

कमिश्नर ने अगले एक सप्ताह में सभी लंबित मुआवजा और अतिरिक्त मुआवजा प्रकरण तैयार कर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से वितरण कराने के निर्देश दिए हैं।

केन-बेतवा लिंक परियोजना के शिविर कब और कहां लगेंगे?

5 अक्टूबर से तारा, अहिरगुआं, पटी बजरिया, झरकुआं, उड़ला और रामपुर गांवों में क्रमशः शिविर लगाए जाएंगे।

मझगांव और कुंवरपुर में दल कब पहुंचेगा?

3 अक्टूबर को मझगांव और बालूपुर तथा 4 अक्टूबर को कुंवरपुर में विभागीय दल बैंक खाता और सुविधाओं के आकलन के लिए पहुंचेगा।

बैठक में कौन-कौन अधिकारी मौजूद थे?

बैठक में कमिश्नर दिलीप कुमार के साथ आईजी सागर जोन इरशाद वली, डीआईजी छतरपुर रेंज विजय कुमार खत्री, कलेक्टर ऊषा परमार, एसपी निवेदिता नायडू और जिला पंचायत सीईओ सहित सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

5. विस्थापितों के लिए रोजगार की क्या योजना है?

हर परिवार के लिए रोजगार प्रकरण तैयार किया जाएगा और ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं के स्व-सहायता समूह बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

Disclaimer: यह समाचार कलेक्टर कार्यालय पन्ना द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और बैठक में मौजूद अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

पन्ना  से हमारे संवाददाता राजकुमार प्रजापति की खास रिपोर्ट

हमारी टीम का विशेष आभार

संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)



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