पन्ना कलेक्टर ने जन विश्वास शिविर से पहले सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण के दिए आदेश
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कलेक्टर ने टीएल बैठक में लंबित शिकायतों के त्वरित निराकरण के दिए सख्त निर्देश, जन विश्वास अभियान को लेकर दिए अहम आदेश।
Panna News: पन्ना से हमारे संवाददाता ने बताया कि पन्ना जिले की कलेक्टर ऊषा परमार ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा (टीएल) बैठक में जिले के सभी विभागीय अधिकारियों को लंबित शिकायतों और शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा है कि शासन की मंशा के अनुरूप आम जनता से जुड़ी कोई भी शिकायत या प्रकरण अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए।
बैठक में विशेष रूप से मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान, सीएम हेल्पलाइन, राजस्व प्रकरणों और शासकीय सेवकों के लिए अनिवार्य किए गए आईगॉट प्रशिक्षण को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान पर विशेष फोकस
कलेक्टर ऊषा परमार ने बैठक में कहा कि मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान राज्य सरकार का एक बेहद महत्वपूर्ण अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करना है। इस अभियान के तहत लगने वाले शिविरों में जनता की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया जाना है।
उन्होंने बताया कि आगामी शुक्रवार को गुनौर विकासखंड के पटनातमोली और नचने ग्राम में जन विश्वास शिविर का आयोजन प्रस्तावित है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इस शिविर के आयोजन से पहले गुनौर क्षेत्र से संबंधित सभी लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित किया जाए। कोई भी पात्र हितग्राही शिविर से निराश होकर वापस न जाए, यह संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि केवल खानापूर्ति के लिए शिकायतों को बंद न किया जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर शिकायतकर्ता से संपर्क कर उसकी समस्या का वास्तविक समाधान किया जाए। यदि किसी शिकायत में लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई भी प्रस्तावित की जाएगी।
सीएम हेल्पलाइन और समय-सीमा बाह्य शिकायतों पर सख्ती
बैठक में नॉट अटेंड सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की भी गहन समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी विभाग प्रमुखों से कहा कि सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज हर शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी में है। इसलिए इसकी गंभीरता को समझना होगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि जो शिकायतें समय-सीमा से बाहर (TL Beyond) हो चुकी हैं, उनका तत्परतापूर्वक निराकरण किया जाए। कई बार देखा गया है कि छोटी-छोटी शिकायतें अधिकारियों की उदासीनता के कारण बड़ी बन जाती हैं। ऐसी स्थिति दोबारा निर्मित न हो, इसके लिए सभी एसडीएम और तहसीलदार अपने-अपने क्षेत्र की शिकायतों की रोजाना मॉनिटरिंग करें।
नामांतरण और जाति प्रमाण पत्र के प्रकरण एक सप्ताह में होंगे खत्म
बैठक का सबसे अहम निर्देश राजस्व विभाग से जुड़ा रहा। कलेक्टर ने कहा कि जिले में नामांतरण (Mutation) और जाति प्रमाण पत्र से संबंधित सैकड़ों मामले अभी भी लंबित हैं। ये दोनों ही विषय सीधे तौर पर आम किसान और छात्रों के भविष्य से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने राजस्व अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि अगले एक सप्ताह के भीतर नामांतरण और जाति प्रमाण पत्र के सभी लंबित मामलों को शत-प्रतिशत निराकृत किया जाए। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि नामांतरण में देरी होने से किसानों को न केवल शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है, बल्कि जमीन से जुड़े विवाद भी बढ़ते हैं। इसी तरह जाति प्रमाण पत्र न मिलने से छात्रों को छात्रवृत्ति और प्रवेश में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र पंचायत स्तर पर लंबित न रहें
कलेक्टर श्रीमती परमार ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को निर्देशित किया कि पंचायत स्तर पर किसी भी स्थिति में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के प्रकरण लंबित नहीं रहने चाहिए। यह एक बुनियादी सेवा है और इसके लिए ग्रामीणों को भटकना न पड़े। सभी ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देशित किया जाए कि वे आवेदन प्राप्त होते ही तय समय-सीमा में प्रमाण पत्र जारी करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं में जन्म प्रमाण पत्र एक अनिवार्य दस्तावेज है, इसलिए इसमें देरी से आम लोगों को काफी परेशानी होती है।
शासकीय संपत्तियों का निरीक्षण और परख ऐप पर होगी एंट्री
संभाग आयुक्त के निर्देशों के परिपालन में कलेक्टर ने एक महत्वपूर्ण आदेश भी दिया। उन्होंने जिले के सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने विभाग से संबंधित शासकीय संपत्तियों और संस्थाओं का भौतिक निरीक्षण करें और उसकी जानकारी परख ऐप में दर्ज करें।
निरीक्षण के दायरे में आने वाली संस्थाओं में मदिरा दुकान, स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनबाड़ी केन्द्र, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, गौशाला, स्कूल, नल-जल योजना, छात्रावास, आधार केन्द्र, उचित मूल्य दुकान, पेट्रोल पम्प और गैस एजेंसी जैसी सभी संस्थाएं शामिल हैं। कलेक्टर ने कहा कि इस निरीक्षण का उद्देश्य शासकीय संपत्तियों की वर्तमान स्थिति, उनके संचालन और जनता को मिल रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत को परखना है। सभी कार्यालय प्रमुख अपने अधीनस्थ संस्थाओं का स्वयं निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही वन व्यवस्थापन कार्यवाही से संबंधित ऑनलाइन प्रशिक्षण को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
पीएम श्रमयोगी मानधन योजना में बढ़ाएं पंजीयन
कलेक्टर ने आगामी जन विश्वास शिविरों को लेकर एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन शिविरों में प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के तहत अधिक से अधिक असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीयन किया जाए। यह योजना असंगठित मजदूरों के बुढ़ापे की लाठी है, जिसमें 60 वर्ष की आयु के बाद 3000 रुपये प्रतिमाह पेंशन का प्रावधान है।
उन्होंने श्रम विभाग और पंचायत विभाग को निर्देश दिए कि इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। मुनादी, पोस्टर, बैनर और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को इस योजना की जानकारी दी जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्र श्रमिक इसका लाभ ले सकें।
भूमि आवंटन और न्यायालयीन प्रकरणों की भी हुई समीक्षा
टीएल बैठक में विभिन्न विभागों के भूमि आवंटन के लंबित प्रस्तावों और न्यायालयीन प्रकरणों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि शासन की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया लंबित है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। न्यायालय में लंबित प्रकरणों में समय पर जवाबदावा प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि शासन का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।
बैठक में गुनौर नगर में भारी वाहनों के आवागमन को बायपास से किए जाने के संबंध में भी चर्चा की गई। नगर में आए दिन भारी वाहनों के कारण जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनती है, इस पर कलेक्टर ने पुलिस और परिवहन विभाग को संयुक्त रूप से कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
इस महत्वपूर्ण बैठक में वनमंडलाधिकारी उत्तर एवं दक्षिण, उप संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व, जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टर सहित जिले के सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रत्येक शासकीय सेवक के लिए आईगॉट (iGOT) ट्रेनिंग अब अनिवार्य
टीएल बैठक में एक और बड़ा फैसला लिया गया जो जिले के हर एक सरकारी कर्मचारी से जुड़ा है। कलेक्टर ने जानकारी दी कि आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के एजेंडा के अनुसार अब जिले के प्रत्येक शासकीय विभाग के हर कर्मचारी, चाहे वह अधिकारी हो या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, के लिए आईगॉट पोर्टल पर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
क्या है मिशन कर्मयोगी और आईगॉट पोर्टल?
भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों के क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसी मिशन के तहत आईगॉट कर्मयोगी पोर्टल बनाया गया है, जो एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म है। इस पोर्टल पर विभिन्न विषयों पर हजारों कोर्स उपलब्ध हैं, जिन्हें देश के बड़े संस्थानों और विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को नई तकनीक, नए कानून और बेहतर कार्यशैली से अपडेट रखना है।
एआई (AI) का कोर्स करना होगा पूरा
कलेक्टर ने बताया कि वर्तमान में सभी कर्मचारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संबंधित एक विशेष पाठ्यक्रम को पूर्ण करना अनिवार्य किया गया है। आने वाले समय में तकनीक के इस युग में एआई की जानकारी हर विभाग के लिए जरूरी हो जाएगी। इसलिए शासन चाहता है कि हर कर्मचारी एआई की बुनियादी समझ रखे।
उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में आईगॉट प्रशिक्षण को ई-एचआरएमएस (e-HRMS) पोर्टल से लिंक किया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि आपने कौन सा कोर्स किया है, यह जानकारी आपके सर्विस रिकॉर्ड में दिखेगी। इतना ही नहीं, वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (ACR) में भी इस प्रशिक्षण की जानकारी दर्ज करना प्रस्तावित है। जो कर्मचारी प्रशिक्षण पूरा नहीं करेंगे, उनका ACR प्रभावित हो सकता है।
कलेक्टर ने सभी कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे अपने अधीन कार्यरत सभी लोकसेवकों का पंजीयन आईगॉट पोर्टल पर सुनिश्चित कराएं और इसका प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें। इस प्रशिक्षण को पूरा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है। साथ ही, एक सप्ताह के भीतर सभी प्रमुख विभाग अपने विभाग से मास्टर ट्रेनर भी नामांकित करें, जो अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण में मदद कर सकें।
बैठक के दौरान ई-दक्ष केन्द्र के प्रशिक्षक वैभव सोनी द्वारा मिशन कर्मयोगी और कर्मयोगी कर्त्तव्य कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा के बारे में प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि अब पंजीकृत लोकसेवकों को अपनी प्रोफाइल पर जिले की जानकारी अपडेट करने की सुविधा भी पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है, जिससे प्रशिक्षण का रिकॉर्ड और भी सटीक रहेगा।
इस फैसले का क्या होगा असर?
शासन के इस फैसले से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है। जब हर कर्मचारी नई तकनीक और नए नियमों से अपडेट रहेगा, तो आम जनता को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। फाइलों का निपटारा तेजी से होगा और लोगों को कार्यालयों के चक्कर कम काटने पड़ेंगे।
कुल मिलाकर, सोमवार को हुई यह टीएल बैठक कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण रही। कलेक्टर ऊषा परमार के सख्त तेवरों से यह स्पष्ट है कि जिले में लापरवाही और टालमटोल की कार्यसंस्कृति अब नहीं चलेगी। आम जनता की शिकायतों का त्वरित निराकरण और शासन की योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
पन्ना जिले से हमारी संपदाता राजकुमार प्रजापति की खास रिपोर्ट
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)


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