अजयगढ़ से बड़ी खबर: मझगाये डेम आंदोलन के 9 लोगों को मिली जमानत, कांग्रेस ने की पैरवी - लोकल रिपोर्ट
मझगांय डैम विस्थापितों के आंदोलन को मिला कांग्रेस का सहारा, 9 आंदोलनकारियों को 50-50 हजार के मुचलके पर मिली जमानत - एडवोकेट राकेश गर्ग ने की पैरवी, भरत मिलन ने लगाया पट्टा।
मझगांय डैम आंदोलन पन्ना: 9 आंदोलनकारियों को 50 हजार के मुचलके पर मिली जमानत
By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 6 अक्टूबर 2026 | Ajaigarh News
Ajaigarh News: अजयगढ़ पन्ना से हमारे संवाददाता ने बताया की पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मझगांय डैम विस्थापन आंदोलन से जुड़े 9 आंदोलनकारियों को तहसीलदार न्यायालय अजयगढ़ ने बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। कई दिनों से जेल में बंद इन आंदोलनकारियों की रिहाई का रास्ता अब साफ हो गया है। इस पूरे मामले में कांग्रेस पार्टी ने विस्थापितों के साथ खड़े होकर एक बड़ी राजनीतिक और मानवीय मिसाल पेश की है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनीश खान के निर्देश पर जिला उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश गर्ग ने न्यायालय में मजबूत पैरवी की और अपना वकालतनामा दाखिल किया। वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी भरत मिलन ने अपना पट्टा लगाकर सभी 9 लोगों की जमानत में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश यादव और अशोक सेन भी न्यायालय में मौजूद रहे, जिससे आंदोलनकारियों के परिवारों को काफी हौसला मिला।
क्या है पूरा मामला? क्यों गिरफ्तार हुए थे 9 आंदोलनकारी?
यह पूरा मामला पन्ना जिले की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित सिंचाई परियोजनाओं में से एक मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना से जुड़ा हुआ है। इस डैम को अजयगढ़ और गुनौर क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान माना जाता है, लेकिन इस डैम के कारण जिन किसानों की जमीन गई, उनके लिए यह आज भी एक बड़ा अभिशाप बना हुआ है।
पिछले दो महीनों से मझगांय डैम से प्रभावित विस्थापित किसान अपनी 4 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे थे। इस आंदोलन का नेतृत्व जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और विस्थापितों की आवाज बन चुके अमित भटनागर कर रहे थे। सैकड़ों की संख्या में किसान और महिलाएं अजयगढ़ तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठे थे।
विस्थापितों का आरोप है कि वर्ष 2015-16 में जब उनकी पुश्तैनी जमीनों का अधिग्रहण किया गया था, तब सरकार ने उनसे कई बड़े वादे किए थे। कहा गया था कि उन्हें बाजार दर से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा, पुनर्वास कॉलोनी में पक्का मकान दिया जाएगा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। लेकिन 8 साल बीत जाने के बाद भी ये वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं।
इसी मांग को लेकर जब आंदोलन तेज हुआ और भीड़ बढ़ने लगी, तो प्रशासन को कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हुई। इसी आशंका के चलते अजयगढ़ पुलिस ने एहतियातन तौर पर कार्रवाई करते हुए 9 प्रमुख लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 170, 126(2) और 135(3) के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। इसके बाद सभी को तहसीलदार न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया था।
BNSS की धारा 126 और 170 क्या है? आसान भाषा में समझें
बहुत से लोगों के मन में सवाल है कि BNSS की ये धाराएं क्या हैं? क्या ये कोई गंभीर अपराध हैं? तो आपको बता दें कि ये कोई चोरी, लूट या हत्या जैसी आपराधिक धाराएं नहीं हैं।
BNSS यानी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, जो 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू हुई है और इसने पुरानी CRPC की जगह ली है। इसकी धारा 126 के तहत यदि किसी व्यक्ति से शांति भंग होने की आशंका हो तो कार्यपालिक मजिस्ट्रेट (तहसीलदार) उसे बुलाकर 1 साल तक शांति बनाए रखने के लिए 50 हजार तक के मुचलके पर पाबंद कर सकता है। धारा 170 पुलिस को यह अधिकार देती है कि वह शांति भंग करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करे। धारा 135(3) में मुचलका न भरने पर जेल भेजने का प्रावधान है।
सरल शब्दों में कहें तो यह एक निवारक कार्रवाई होती है, ताकि कोई बड़ी घटना होने से पहले ही उसे रोका जा सके। आंदोलन के मामलों में अक्सर पुलिस इसी धारा के तहत कार्रवाई करती है।
कांग्रेस ने कैसे की मदद? जिलाध्यक्ष अनीश खान की भूमिका
जैसे ही इस गिरफ्तारी की खबर कांग्रेस संगठन तक पहुंची, पन्ना जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनीश खान ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने तुरंत अपने जिला उपाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश गर्ग को फोन लगाकर कहा कि विस्थापित हमारी अपनी जनता है, हमें हर हाल में उनकी कानूनी मदद करनी है।
जिलाध्यक्ष के निर्देश पर एडवोकेट राकेश गर्ग ने बिना एक रुपया फीस लिए इस केस को अपने हाथ में लिया। वे अजयगढ़ न्यायालय पहुंचे और 9 लोगों की ओर से जमानत याचिका तैयार की। उन्होंने न्यायालय में अपना वकालतनामा लगाया।
न्यायालय में बहस के दौरान एडवोकेट राकेश गर्ग ने कहा, माननीय न्यायाधीश महोदय, मेरे पक्षकार सभी किसान हैं, मजदूर हैं। इनकी जमीनें सरकार ने डैम के लिए ले ली हैं। ये कोई आदतन अपराधी नहीं हैं। इनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। ये केवल अपने पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। भारत के संविधान ने हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार दिया है। ऐसे में इन्हें जेल में रखना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। मैं न्यायालय से प्रार्थना करता हूं कि इन्हें 50 हजार के मुचलके पर जमानत दी जाए।
न्यायालय ने उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए सभी 9 लोगों की जमानत मंजूर कर ली।
भरत मिलन ने लगाया अपना पट्टा, कहा - जनता मेरी अपनी है
इस पूरी जमानत प्रक्रिया में सबसे भावुक क्षण तब आया जब जमानत के लिए जमानतदार और पट्टे की जरूरत पड़ी। अक्सर गरीब और विस्थापित परिवारों के लिए 50 हजार का मुचलका और उसके लिए पट्टा दिखाना सबसे बड़ी चुनौती होता है। कई परिवारों के पास तो अपनी जमीन के कागज भी नहीं हैं, क्योंकि उनकी जमीन तो डैम में जा चुकी है।
ऐसी स्थिति में अजयगढ़ क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी और क्षेत्र के लोकप्रिय नेता भरत मिलन आगे आए। उन्होंने मानवता दिखाते हुए अपना स्वयं का पट्टा न्यायालय में जमा किया और 9 लोगों के जमानतदार बने।
इस मौके पर भरत मिलन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, मैं भले ही पिछला चुनाव हार गया हूं, लेकिन इस क्षेत्र की जनता से मेरा रिश्ता चुनावी नहीं, बल्कि पारिवारिक है। मैं जानता हूं कि इन विस्थापित परिवारों ने कितना दर्द सहा है। इनके खेत चले गए, घर चले गए, और आज जब ये अपने हक की बात कर रहे हैं तो इन्हें जेल में डाल दिया गया। यह सरासर गलत है। जनता की समस्या मेरी अपनी समस्या है। इसलिए मैंने जो बन सका, वह किया। मैं आगे भी इनके साथ खड़ा रहूंगा।
भरत मिलन के इस कदम की पूरे अजयगढ़ क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके इस फैसले की सराहना कर रहे हैं।
इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा, भाजपा सरकार केवल कागजों में विकास दिखाती है। जमीनी हकीकत यह है कि मझगांय डैम के विस्थापित आज भी टीन शेड में रहने को मजबूर हैं। वहीं ब्लॉक अध्यक्ष अशोक सेन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी विस्थापितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को भोपाल विधानसभा तक ले जाया जाएगा।
अजयगढ़ से बड़ी खबर: मझगाये डेम आंदोलन के 9 लोगों को मिली जमानत, कांग्रेस ने की पैरवी - लोकल रिपोर्ट
अजयगढ़। मझगाये डेम विस्थापितों के आंदोलन में गिरफ्तार हुए 9 आंदोलनकारियों को आखिरकार जमानत मिल गई है। कई दिनों से जेल में बंद इन लोगों के लिए कांग्रेस आगे आई और उनकी जमानत करवाई।
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनीश खान के कहने पर जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट राकेश गर्ग ने कोर्ट में पैरवी की। उन्होंने सभी 9 लोगों की तरफ से वकालतनामा लगाया। वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी भरत मिलन ने अपना पट्टा लगाकर जमानत में मदद की। इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश यादव और अशोक सेन भी तहसील कोर्ट में मौजूद रहे।
तहसीलदार अजयगढ़ ने सभी को 50-50 हजार के मुचलके पर 5 शर्तों के साथ जमानत दी है।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
आपको बता दें कि मझगाये डेम से प्रभावित किसान लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर धरने पर थे। इस आंदोलन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे थे। किसानों का कहना है कि डेम में उनकी जमीन चली गई लेकिन पूरा मुआवजा आज तक नहीं मिला।
धरना प्रदर्शन के दौरान भीड़ ज्यादा बढ़ने पर पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए 9 लोगों को पकड़ लिया था। पुलिस ने इन पर BNSS की धारा 170, 126(2) और 135(3) के तहत कार्रवाई की थी। ये धाराएं शांति भंग के मामले में लगती हैं, कोई बड़ा अपराध नहीं है। इसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया था।
कांग्रेस ने निभाया साथ:
जेल जाने की खबर मिलते ही कांग्रेस में हलचल तेज हो गई। जिलाध्यक्ष अनीश खान ने तुरंत अधिवक्ता राकेश गर्ग को फोन किया और कहा कि अपने लोगों की मदद करनी है।
राकेश गर्ग अजयगढ़ कोर्ट पहुंचे और जमानत की अर्जी लगाई। कोर्ट में उन्होंने कहा कि साहब ये सब किसान लोग हैं, कोई अपराधी नहीं हैं। अपने हक के लिए आवाज उठा रहे थे। इन्हें जेल में रखना ठीक नहीं है।
कोर्ट ने उनकी बात सुनी और सभी 9 को जमानत दे दी।
भरत मिलन ने लगाया पट्टा:
जमानत में सबसे बड़ी दिक्कत पट्टे की आ रही थी। गरीब परिवार 50 हजार का मुचलका कहां से लाते। ऐसे में पूर्व प्रत्याशी भरत मिलन आगे आए।
भरत मिलन ने कहा कि मैं यहां से चुनाव लड़ा हूं, यहां की जनता मेरी अपनी जनता है। इनका दुख मेरा दुख है। इसलिए मैंने अपना पट्टा लगाया है। आगे भी जनता के साथ खड़ा रहूंगा।
उनके इस कदम की अजयगढ़ में काफी चर्चा हो रही है। विस्थापित परिवारों ने भी उनका धन्यवाद किया है।
इन 9 लोगों को मिली जमानत:
1. अमित भटनागर पिता संतोष 44 साल, बिजावर
2. सुखदेव पिता राममिलन 25 साल, विश्रामगंज अजयगढ़
3. राकेश पिता प्रजपाल कोंदर 37 साल, विश्रामगंज
4. रामौतार पिता रामसनेही कोंदर 23 साल, विश्रामगंज
5. महेश पिता किशोरी लाल वंशकार 31 साल, कुंवरपुर
6. भगवानदास पिता रामभरोसी कोंदर 33 साल, टपरियन बनहरी कला
7. रामरतन पाल पिता कल्लू पाल 31 साल, कुंवरपुर
8. गया प्रसाद पिता कामता प्रसाद कोंदर 31 साल, टपरियन बनहरी कला
9. अशोक द्विवेदी 55 साल, कुंवरपुर
जमानत की 5 शर्तें:
तहसीलदार ने जमानत देते हुए 5 शर्तें रखी हैं -
1. सभी लोग शांति बनाए रखेंगे।
2. बिना परमिशन के धरना प्रदर्शन नहीं करेंगे।
3. पुलिस या कोर्ट जब बुलाएगी तो हाजिर होना पड़ेगा।
4. बिना बताए जिला छोड़कर नहीं जाएंगे।
5. शर्त तोड़ने पर जमानत रद्द हो जाएगी।
क्या है मझगाये डेम का पूरा मामला?
दरअसल मझगाये डेम पन्ना जिले की बड़ी परियोजना है। अजयगढ़ और गुनौर के करीब 40 गांवों को इससे पानी मिलना था। इसके लिए कुंवरपुर, विश्रामगंज, बनहरी कला समेत कई गांवों की जमीन ली गई थी।
सरकार ने वादा किया था कि 4 गुना मुआवजा, रहने को जमीन और एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी। लेकिन किसानों का आरोप है कि आज 8-9 साल बाद भी पूरा पैसा नहीं मिला। कई परिवार आज भी टिन शेड में रह रहे हैं। पुनर्वास कॉलोनी में न लाइट है न पानी। इसी को लेकर किसान बार-बार आंदोलन कर रहे हैं।
अब आगे क्या?
फिलहाल सभी की जमानत हो गई है और आज शाम तक सब जेल से बाहर आ जाएंगे। कांग्रेस ने कहा है कि वह विस्थापितों के साथ है। अगर सरकार ने जल्द उनकी नहीं सुनी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था के लिए कार्रवाई की थी। जल्द ही विस्थापितों की मांगों को लेकर बैठक बुलाई जाएगी।
कुल मिलाकर अजयगढ़ में इस जमानत के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस की इस सक्रियता से विस्थापितों में भी हिम्मत आई है। अब देखना होगा कि प्रशासन उनके मुआवजे वाले मामले में क्या फैसला लेता है।
अजयगढ़ पन्ना से हमारे संवाददाता की ख़ास रिपोर्ट।
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)


टिप्पणियाँ