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मझगांये डेम में मुआवजे की मांग के बीच आदिवासी महिला की मौत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनीश खान बोले- यह सामान्य मौत नहीं प्रशासनिक लापरवाही से हत्या है

मझगांये डेम विस्थापित मृतक महिला रमिया आदिवासी का परिवार
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पत्रकार: राजकुमार प्रजापति। अजयगढ़, पन्ना मध्यपदेश, 17 सितम्बर 2026

मझगांये डेम में मुआवजे की मांग के बीच महिला की मौत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले- 'प्रशासन की लापरवाही से गई जान'

Ajaygarh News: आपका न्यूज़ स्टार के संवाददाता राजकुमार प्रजापति मौके पर मौजूद रहे। राजकुमार ने  जानकारी देते हुए बताया की पन्ना जिले की सबसे चर्चित और विवादों में घिरी मझगांये डेम परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई शिलान्यास या उद्घाटन नहीं, बल्कि एक गरीब आदिवासी महिला की मौत है। विस्थापन की पीड़ा, मुआवजे का इंतजार और प्रशासनिक उपेक्षा के बीच अजयगढ़ क्षेत्र की रमिया आदिवासी की मौत ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया है। इस घटना के बाद अब सियासत भी गरमा गई है।

कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की लापरवाही और मानसिक प्रताड़ना से हुई मौत करार दिया है और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

क्या है पूरा मामला?

मामला पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील के अंतर्गत बन रहे मझगांये डेम का है। यह डेम बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना के रूप में देखी जा रही थी। इस बांध से हजारों हेक्टेयर जमीन सिंचित होने का दावा किया गया था। लेकिन इस विकास की कीमत उन सैकड़ों गरीब आदिवासी और पिछड़े परिवारों ने चुकाई है जिनकी जमीन, घर और खेत इस डेम की जद में आ गए।

नियमानुसार इन विस्थापित परिवारों को जमीन के बदले मुआवजा, मकान के बदले व्यवस्थापन राशि और पुनर्वास की सुविधा मिलनी चाहिए थी। आरोप है कि सालों बीत जाने के बाद भी कई परिवारों को पूरी राशि नहीं मिली। कुछ को आधी-अधूरी राशि देकर टरका दिया गया, तो कई परिवार आज भी कागजों में ही मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।

इसी मांग को लेकर पिछले कई दिनों से विस्थापित परिवार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। इसी बीच प्रदर्शन में शामिल एक महिला विस्थापित रमिया आदिवासी की अचानक तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि लगातार की चिंता, आर्थिक तंगी और प्रशासन द्वारा बार-बार चक्कर कटवाने से महिला मानसिक रूप से काफी परेशान थी।

मौत के बाद पहुंचा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, दी श्रद्धांजलि

घटना की खबर मिलते ही राजनीति तेज हो गई। शुक्रवार को पन्ना कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनीश खान अपने समर्थकों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ मृतक रमिया आदिवासी के घर पहुंचे।

उन्होंने वहां पहुंचकर सबसे पहले पीड़ित परिवार से मुलाकात की और महिला को श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर सभी भावुक हो गए। घर में मातम का माहौल था। अनीश खान ने जमीन पर बैठकर परिजनों से विस्तार से पूर घटना और उनकी समस्याओं को सुना।

इस दौरान उनके साथ भरत मिलन पांडे, ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश यादव, नगर अध्यक्ष पन्ना स्वतंत्र अवस्थी, आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, पूर्व कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष राकेश गर्ग, राजू यादव, रिंकू खान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

परिजनों ने रोते हुए बताया कि डेम में उनकी पूरी जमीन चली गई। मुआवजे के लिए वे पिछले दो साल से तहसील और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन राशि खाते में नहीं आती। रमिया आदिवासी इसी चिंता में दिन-रात घुल रही थी।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनीश खान का बड़ा बयान - 'यह हत्या है'

पीड़ित परिवार से मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनीश खान ने शासन और जिला प्रशासन पर जमकर हमला बोला।

उन्होंने कहा, "यह कोई सामान्य मौत नहीं है, यह प्रशासनिक लापरवाही से की गई हत्या है। एक गरीब आदिवासी महिला जिसने अपना सब कुछ इस डेम के लिए दे दिया, उसे उसके हक का पैसा तक नहीं दिया गया। उसे मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया कि उसकी जान चली गई। इसका जिम्मेदार कौन है?"

अनीश खान ने आगे कहा, "भाजपा सरकार बड़े-बड़े दावे करती है कि हम आदिवासियों के हितैषी हैं। अगर हितैषी हैं तो मझगांये डेम के विस्थापित आज भी क्यों भटक रहे हैं? उनकी व्यवस्थापन राशि कहां है? यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है?"

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 15 दिनों के भीतर मृतक महिला के परिजनों को उचित मुआवजा और सभी विस्थापितों की लंबित राशि नहीं दी गई, तो कांग्रेस अजयगढ़ से लेकर पन्ना जिला मुख्यालय तक बड़ा आंदोलन करेगी। जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को विधानसभा और लोकसभा तक उठाया जाएगा।

मझगांये डेम परियोजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

इस मौके पर कांग्रेस ने मझगांये डेम परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि हमें लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि मुआवजा वितरण में भारी अनियमितता बरती गई है।

कई ऐसे लोगों को भी मुआवजा बांट दिया गया जिनका जमीन से कोई लेना-देना नहीं था, जबकि असली हकदार आज भी दर-दर भटक रहे हैं। जमीन के मूल्यांकन में भी गड़बड़ी की गई है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। जो भी अधिकारी या नेता इस भ्रष्टाचार में शामिल है, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। हम इसकी शिकायत लोकायुक्त से भी करेंगे।

आखिर क्यों अटका है विस्थापितों का मुआवजा?

स्थानीय लोगों से बात करने पर इस पूरे विवाद की जड़ समझ में आती है। दरअसल, मझगांये डेम की प्रक्रिया 2018-19 में शुरू हुई थी। उस समय प्रशासन ने जमीनों का सर्वे किया था। कई परिवारों ने अपनी पुश्तैनी जमीन सरकार को दे दी।

शुरुआत में कुछ परिवारों को मुआवजा मिल भी गया, लेकिन बाद में प्रक्रिया धीमी हो गई। विस्थापितों के अनुसार तीन बड़ी समस्याएं हैं:

1. मुआवजा राशि में अंतर: एक ही गांव के दो किसानों को अलग-अलग राशि दी गई, जबकि दोनों की जमीन एक जैसी थी।

2. व्यवस्थापन राशि नहीं मिली: जमीन के अलावा घर बनाने के लिए जो 2 से 3 लाख रुपये की व्यवस्थापन राशि मिलनी थी, वो अधिकांश परिवारों को नहीं मिली।

3. कागजी उलझन: पटवारी और बाबुओं द्वारा जानबूझकर कागजों में कमी निकालकर लोगों को चक्कर कटवाए जा रहे हैं।

इसी वजह से विस्थापित परिवारों में भारी नाराजगी है। वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

प्रशासन पर टिकी हैं सबकी नजरें

रमिया आदिवासी की मौत के बाद अब गेंद पूरी तरह से जिला प्रशासन के पाले में है। कांग्रेस के इस तरह से आक्रामक रुख अपनाने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।

क्या मृतक परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी? क्या सभी विस्थापितों की लंबित राशि का भुगतान होगा? और क्या इस परियोजना में हुए भ्रष्टाचार की जांच होगी?

फिलहाल अजयगढ़ में माहौल तनावपूर्ण है। विस्थापित परिवारों ने साफ कह दिया है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। रमिया आदिवासी की मौत ने इस आंदोलन को एक नया मोड़ दे दिया है। अब यह सिर्फ मुआवजे की लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय की लड़ाई बन गई है।

पन्ना जिले की राजनीति में आने वाले दिनों में मझगांये डेम का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर जब कांग्रेस ने इसे गरीब, शोषित और वंचित आदिवासियों की लड़ाई बनाकर विधानसभा तक ले जाने का ऐलान कर दिया है।


हमारी टीम का विशेष आभार

संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)






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