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आशापुरी की 4.5 मीटर विशाल जैन प्रतिमा का होगा वैज्ञानिक संरक्षण, पुरातत्व विभाग ने 40 लाख का बजट किया मंजूर
ब्यूरो.रायसेन। रायसेन जिले के ऐतिहासिक आशापुरी-सतमसिया जैन मंदिर समूह के संरक्षण को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हो रही इस प्राचीन जैन धरोहर को बचाने की दिशा में अब ठोस काम शुरू हो गया है।
जैन धरोहर संरक्षण परिषद (JHPC), सर्वोदय सामाजिक संस्था द्वारा लगातार शासन और प्रशासन से की जा रही मांग आखिरकार रंग लाई है। परिषद के प्रयासों के बाद पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग, मध्यप्रदेश ने आशापुरी के संरक्षण के लिए प्रथम चरण में लगभग 40 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस खबर के बाद स्थानीय लोगों और जैन समाज में खुशी का माहौल है।
पुरातत्व विभाग की टीम ने आशापुरी पहुंचकर किया निरीक्षण
इसी क्रम में बुधवार को पुरातत्व विभाग की एक विशेष टीम ने आशापुरी पहुंचकर पूरे मंदिर परिसर का गहन निरीक्षण किया। इस टीम का नेतृत्व वरिष्ठ पुरातत्व विशेषज्ञ और आशापुरी परियोजना के प्रभारी श्री रमेश यादव ने किया।
टीम ने पूरे दिन परिसर में रहकर प्राचीन मंदिरों के चबूतरों, खंडित स्तंभों, शिलालेखों और गर्भगृह क्षेत्रों की बारीकी से जांच की। अधिकारियों ने आवश्यक माप-जोख भी की ताकि आगे की कार्ययोजना को सही तरीके से बनाया जा सके।
निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान परिसर में खुले आसमान के नीचे पड़ी करीब 4.5 मीटर यानी लगभग 15 फीट ऊंची विशाल जैन तीर्थंकर प्रतिमा पर दिया गया। यह प्रतिमा कई वर्षों से बिना किसी सुरक्षा के पड़ी हुई है, जिसके कारण इसका क्षरण हो रहा है। टीम ने प्रतिमा की वर्तमान स्थिति, उस पर लगी काई और पत्थर की मजबूती का जायजा लिया।
तीन चरणों में पूरा होगा संरक्षण और विकास का कार्य
पुरातत्व विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार पूरे संरक्षण कार्य को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा, ताकि हर काम वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से हो सके।
पहले चरण में परिसर की व्यापक स्तर पर साफ-सफाई की जाएगी। झाड़ियों और मलबे को हटाया जाएगा। इसके बाद मंदिर के चबूतरे और गर्भगृह वाले हिस्से में पुरातात्विक जांच और वैज्ञानिक उत्खनन का काम किया जाएगा। विभाग का मानना है कि उत्खनन के दौरान जमीन के नीचे दबे हुए कई महत्वपूर्ण प्राचीन अवशेष और संरचनाएं मिल सकती हैं। यदि ऐसी कोई संरचना मिलती है तो उसे पुरातात्विक मानकों के अनुसार ही संरक्षित किया जाएगा। साथ ही इस चरण में अस्थायी पहुंच मार्ग को भी ठीक किया जाएगा।
दूसरा चरण इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इस चरण में 4.5 मीटर ऊंची विशाल जैन तीर्थंकर प्रतिमा का संरक्षण किया जाएगा। यह कार्य देश के जाने-माने पत्थर संरक्षण विशेषज्ञों की देखरेख में होगा। सबसे पहले प्रतिमा की वैज्ञानिक पद्धति से सफाई की जाएगी, फिर उस पर विशेष रसायनों का लेपन किया जाएगा ताकि पत्थर का क्षरण रुक सके। लेपन के बाद प्रतिमा को क्रेन और आधुनिक तकनीक की मदद से उसके मूल स्थान पर सम्मान के साथ पुनः स्थापित किया जाएगा।
तीसरे और अंतिम चरण में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बुनियादी विकास कार्य किए जाएंगे। इसमें पक्की सड़क का निर्माण, पूरे परिसर का समतलीकरण, सुरक्षा के लिए चारदीवारी, वाहनों के लिए पार्किंग स्थल, एक आकर्षक मुख्य प्रवेश द्वार और रात के समय सुरक्षा के लिए लाइट व चौकीदार की व्यवस्था शामिल है।
अधिकारियों के प्रयासों की सराहना
जैन धरोहर संरक्षण परिषद (JHPC) ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए पुरातत्व विभाग का आभार व्यक्त किया है। परिषद ने विशेष रूप से विभाग के संचालक श्री मदन कुमार (IAS) के सकारात्मक दृष्टिकोण और मार्गदर्शन की सराहना की है।
साथ ही परिषद ने उप संचालक डॉ. मनीषा शर्मा की सक्रियता और संवेदनशीलता की भी प्रशंसा की है। परिषद के सदस्यों के अनुसार, डॉ. शर्मा ने इस विषय को गंभीरता से लिया और बजट आवंटन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया, जिसके कारण ही स्थल निरीक्षण संभव हो पाया।
इस निरीक्षण के दौरान JHPC की ओर से इंजीनियर अजित कुमार जैन और राजीव जैन (भास्कर) भी उपस्थित रहे। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को परिषद की मंशा से अवगत कराया और सुझाव दिया कि यह कार्य केवल एक प्रतिमा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे आशापुरी-सतमसिया मंदिर समूह की ऐतिहासिकता को बचाने का एक बड़ा प्रयास होना चाहिए।
क्यों खास है आशापुरी की यह धरोहर?
आशापुरी का यह मंदिर समूह 10वीं से 11वीं शताब्दी का माना जाता है। यह स्थान कभी एक बड़ा जैन तीर्थ केंद्र था। यहाँ की कला और स्थापत्य बुंदेलखंड की समृद्ध संस्कृति को दर्शाते हैं। यहाँ की विशाल प्रतिमा भगवान ऋषभदेव जी की मानी जाती है। ऐसी विशाल प्रतिमाओं का संरक्षण हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारे गौरवशाली इतिहास को सहेज कर रखने जैसा है। यह सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि हमारी विरासत है।
सर्वोदय सामाजिक संस्था के अध्यक्ष पंकज जैन ने कहा कि परिषद का उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं, बल्कि विभाग और प्रशासन के साथ मिलकर सहयोग की भावना से इस अमूल्य धरोहर का संरक्षण करना है।
