कुँवरपुर नाले में दुर्गा विसर्जन के दौरान हादसा: डूबे 55 वर्षीय बुजुर्ग का शव दूसरे दिन मिला, NDRF के रेस्क्यू के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 22 अक्टूबर 2026 | Ajaigarh, Panna MP News
Ajaigarh News: नवरात्रि के उत्साह और दुर्गा पूजा की भक्ति के बीच पन्ना जिले के अजयगढ़ से एक हृदय विदारक खबर सामने आई है। अजयगढ़ थाना क्षेत्र की हनुमतपुर चौकी अंतर्गत आने वाले ग्राम कुँवरपुर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान नाले में डूबे एक व्यक्ति का शव दूसरे दिन बरामद किया गया। मृतक की पहचान भवनीदीन विश्वकर्मा, उम्र 55 वर्ष, निवासी कुँवरपुर के रूप में हुई है।
यह घटना 21 अक्टूबर को विसर्जन के दौरान हुई, जिसके बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी और मातम का माहौल बन गया। ग्रामीणों द्वारा प्रारंभिक स्तर पर तलाश करने के बाद जब कोई सफलता नहीं मिली तो पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद 22 अक्टूबर की सुबह प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया, जिसके कई घंटों के संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शव को बरामद किया जा सका।
पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
कैसे हुआ हादसा? 21 अक्टूबर की दोपहर का घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, 21 अक्टूबर को ग्राम कुँवरपुर में स्थापित दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन किया जाना था। इसके लिए गांव के पास स्थित कुँवरपुर नाले को विसर्जन स्थल के रूप में चिह्नित किया गया था।
दोपहर के समय जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में नाले के किनारे एकत्रित हुए और विसर्जन की प्रक्रिया चल रही थी, तभी भवनीदीन विश्वकर्मा का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चले गए। नाले में पानी का बहाव तेज और गहराई अधिक होने के कारण वह देखते ही देखते डूब गए।
मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी की गहराई और कीचड़ के कारण वे सफल नहीं हो सके। कुछ ही मिनटों में वह आंखों से ओझल हो गए।
रात भर तलाश, सुबह बुलाई गई NDRF
घटना के बाद गांव के युवाओं और परिजनों ने नाले में उतरकर तलाश शुरू की। टॉर्च और लाठियों के सहारे देर रात तक खोजबीन चलती रही, लेकिन अंधेरा और पानी का बढ़ा हुआ स्तर बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बना।
आखिरकार ग्रामीणों ने हनुमतपुर चौकी पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पन्ना जिला प्रशासन और होमगार्ड को अवगत कराया गया।
22 अक्टूबर की सुबह NDRF और SDRF की टीम को अजयगढ़ बुलाया गया। पुलिस, NDRF के प्रशिक्षित गोताखोर और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर करीब 4 से 5 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान बोट और विशेष उपकरणों की मदद से पूरे नाले के हिस्से को खंगाला गया और अंततः शव को बरामद कर लिया गया।
मृतक भवनीदीन विश्वकर्मा: गांव में मिलनसार छवि
मृतक भवनीदीन विश्वकर्मा गांव के एक सम्मानित और मिलनसार व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। 55 वर्षीय भवनीदीन खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे और बेटियां हैं। दुर्गा पूजा में वह सक्रिय रूप से शामिल रहते थे और हर साल विसर्जन में आगे रहते थे।
उनकी असामयिक मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में भी शोक की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि यह एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।
सबसे बड़ा सवाल: चिह्नित विसर्जन स्थल पर सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं थे?
इस पूरे हादसे के बाद अब प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जो 5 बड़े सवाल उठाए जा रहे हैं, वे बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सवाल नंबर 1: जब स्थल चिह्नित था तो गोताखोर क्यों नहीं थे?
नियम के अनुसार, जब किसी नदी, तालाब या नाले को विसर्जन के लिए आधिकारिक रूप से चिह्नित किया जाता है, तो वहां नगर पालिका, ग्राम पंचायत और पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होते हैं। इसमें गोताखोर, लाइफ जैकेट, रस्सी, ट्यूब और प्राथमिक उपचार किट का होना अनिवार्य है। लेकिन कुँवरपुर में ऐसा कुछ भी नहीं था।
सवाल नंबर 2: पानी की गहराई का आकलन किया गया था क्या?
बताया जा रहा है कि इस साल बारिश अधिक होने से कुँवरपुर नाले में जलस्तर सामान्य से अधिक था। ग्रामीणों के अनुसार नाले में 8 से 10 फीट तक पानी भरा हुआ था। ऐसे में क्या राजस्व या पंचायत विभाग ने विसर्जन से पहले गहराई और बहाव का निरीक्षण किया था?
सवाल नंबर 3: वैकल्पिक और सुरक्षित स्थान क्यों नहीं चुना गया?
यदि नाले में पानी अधिक था, तो प्रशासन को चाहिए था कि वह किसी कम गहरे और सुरक्षित वैकल्पिक स्थल का चयन करता। एक ही खतरनाक जगह पर विसर्जन की अनुमति देना लापरवाही को दर्शाता है।
सवाल नंबर 4: जलभराव की सूचना के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यह सबसे चौंकाने वाला तथ्य है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुँवरपुर नाले में जलभराव के कारण पिछले कई दिनों से आवागमन बाधित हो रहा था। नाले का पानी खेतों और रास्तों में भर गया था। इसको लेकर अजयगढ़ जनपद से लेकर पन्ना जिला मुख्यालय तक के अधिकारियों को लिखित और मौखिक सूचना दी गई थी, लेकिन समय रहते पानी निकालने या बैरिकेडिंग करने की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सवाल नंबर 5: भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल कहां था?
दुर्गा विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में भीड़ जमा होती है। ऐसे में मौके पर पुलिस बल की तैनाती जरूरी होती है ताकि लोगों को गहरे पानी में जाने से रोका जा सके। लेकिन मौके पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था।
NDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन कैसे काम करता है?
इस घटना में NDRF की भूमिका महत्वपूर्ण रही। अक्सर लोग सोचते हैं कि NDRF क्या करती है। NDRF यानी National Disaster Response Force की टीमें आपदा प्रबंधन में विशेष रूप से प्रशिक्षित होती हैं। डूबने की घटनाओं में वे सोनार सिस्टम, अंडरवाटर कैमरा, बोट और डीप डाइविंग गोताखोरों का उपयोग करती हैं।
कुँवरपुर जैसे मामलों में जहां पानी मटमैला और बहाव तेज होता है, वहां स्थानीय गोताखोरों के लिए शव ढूंढना मुश्किल हो जाता है। NDRF की टीम सिस्टमेटिक तरीके से ग्रिड बनाकर सर्च करती है, तब जाकर सफलता मिलती है।
मध्य प्रदेश में विसर्जन के लिए क्या हैं गाइडलाइन?
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन हर साल विसर्जन को लेकर गाइडलाइन जारी करता है। इसके अनुसार
1. विसर्जन स्थल पर 15 फीट तक बैरिकेडिंग होनी चाहिए।
2. हर स्थल पर कम से कम 2 प्रशिक्षित गोताखोर और 2 होमगार्ड जवान तैनात होने चाहिए।
3. पानी की गहराई को दर्शाने के लिए निशान और चेतावनी बोर्ड लगे होने चाहिए।
4. महिलाओं और बच्चों को गहरे पानी में जाने से रोकना चाहिए।
5. विसर्जन के लिए अस्थायी घाट या कृत्रिम कुंड बनाना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
कुँवरपुर की घटना में इनमें से किसी भी गाइडलाइन का पालन होता नहीं दिखा।
अब आगे क्या? प्रशासन को क्या करना चाहिए?
एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया है, अब यह समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं बल्कि सुधार का है। प्रशासन को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
1. जांच समिति का गठन: एसडीएम स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में जांच हो कि विसर्जन स्थल का चयन किसने और किस आधार पर किया।
2. जिम्मेदारी तय हो: यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उस पर कार्रवाई हो।
3. भविष्य की योजना: पन्ना जिले के सभी विसर्जन स्थलों का नया सर्वे कराया जाए और खतरनाक स्थलों को सूची से हटाया जाए। हर जगह कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाने पर जोर दिया जाए।
4. मुआवजा और सहायता: मृतक के परिजनों को शासन की आपदा राहत निधि से उचित आर्थिक सहायता दी जाए।
निष्कर्ष
कुँवरपुर नाले की यह घटना एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की चूक का परिणाम है। त्योहारों का उत्साह तभी सार्थक है जब सुरक्षा पहले हो। यदि समय रहते नाले के जलस्तर की समस्या को सुना जाता और विसर्जन स्थल पर गोताखोरों की तैनाती की जाती, तो शायद आज भवनीदीन विश्वकर्मा अपने परिवार के होते।
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)

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