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मध्यप्रदेश में फिर गूंजेगी चीतों की दहाड़: CM मोहन यादव रविवार को गांधीसागर में छोड़ेंगे बोत्सवाना की मादा चीता CCB2

CM Dr Mohan Yadav releasing Botswana female cheetah CCB2 in Gandhisagar sanctuary Mandsaur MP
Botswana Female Cheetah CCB2 Gandhisagar

पत्रकार: राजकुमार प्रजापति। मध्यपदेश, 19 सितम्बर 2026

मध्यप्रदेश में फिर गूंजेगी चीतों की दहाड़: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को बोत्सवाना की मादा चीता CCB2 को गांधीसागर में करेंगे मुक्त, MP बना दुनिया का चीता हब।

MP News: आपका न्यूज़ स्टार संवाददाता प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित अधिकारियों एवं मध्य प्रदेश सरकार के वन्य जीव संरक्षण मंत्रालय से जानकारी प्राप्त करते हुए बताया कि  मध्यप्रदेश की धरती पर एक बार फिर इतिहास लिखा जाने वाला है। अगर आप सोचते हैं कि जंगल सिर्फ शेर और बाघ के लिए होते हैं, तो अब आपको अपनी सोच बदलनी पड़ेगी। क्योंकि मध्यप्रदेश के जंगलों में अब दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर चीता भी खुलेआम फर्राटे भर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट, प्रोजेक्ट चीता, अब अपने दूसरे सबसे बड़े पड़ाव पर पहुंच गया है। इस रविवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंदसौर-नीमच जिले में स्थित गांधीसागर अभयारण्य में बोत्सवाना से आई मादा चीता CCB2 को आजाद करने जा रहे हैं।

ये खबर सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं है। ये उन लाखों वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक जश्न है जो 70 साल से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। इस एक चीते के आने के बाद गांधीसागर में चीतों की कुल संख्या चार हो जाएगी, जिसमें दो नर और दो मादा शामिल हैं। वन विभाग के बड़े अधिकारियों का कहना है कि यही चार चीते आने वाले पांच साल में यहां 20 से 25 चीतों का एक बड़ा परिवार बना देंगे।

CCB2 कौन है? बोत्सवाना से भारत तक की पूरी कहानी

बहुत से लोग मुझे मैसेज करके पूछ रहे हैं कि ये CCB2 क्या बला है। तो देखिए, मैं आपको आसान भाषा में समझाता हूं। CCB2 का पूरा नाम है Cheetah Conservation Botswana 2। ये एक जवान मादा चीता है, जिसकी उम्र लगभग साढ़े तीन साल है। इसका जन्म बोत्सवाना देश के घांजी नाम के इलाके में हुआ था।

बोत्सवाना को दुनिया में चीतों की राजधानी कहा जाता है। वहां करीब 1500 से ज्यादा चीते खुले में रहते हैं। वहां की सरकार ने भारत के साथ एक समझौता किया है कि वो हमें 8 चीते देगी। उसी समझौते के तहत CCB2 भारत आई है।

28 फरवरी 2026 को उसे एक विशेष विमान, जिसमें सिर्फ जानवरों को ले जाने की सुविधा है, उसमें भारत लाया गया। विमान सीधा ग्वालियर एयरपोर्ट पर उतरा और वहां से उसे सड़क के रास्ते ग्रीन कॉरिडोर बनाकर श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क ले जाया गया।

कूनो में लाने के बाद उसे पहले 30 दिन तक एक छोटे से बाड़े में रखा गया, जिसे क्वारंटीन बाड़ा कहते हैं। वहां देश के सबसे बड़े डॉक्टरों की टीम ने उसकी जांच की। उसका खून, उसका वजन, उसकी दौड़ने की क्षमता, सब कुछ चेक किया गया।

सबसे हैरानी की बात ये रही कि CCB2 ने भारतीय मौसम को बहुत जल्दी अपना लिया। अक्सर अफ्रीका से आने वाले चीतों को भारत की गर्मी में ढलने में 2 महीने लग जाते हैं, लेकिन इसने सिर्फ 25 दिन में ही यहां के खाने और पानी को अपना लिया। मई 2026 में जब इसे कूनो के बड़े बाड़े में छोड़ा गया तो इसने 112 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ लगाई। वहां मौजूद सभी अधिकारी हैरान रह गए।

CM Dr Mohan Yadav releasing Botswana female cheetah CCB2 in Gandhisagar sanctuary Mandsaur MP

कूनो से गांधीसागर क्यों भेजा जा रहा है, इसके पीछे की बड़ी वजह

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि जब कूनो में सब कुछ ठीक चल रहा था, तो इसे वहां से हटाकर गांधीसागर क्यों ले जा रहे हैं। इसके पीछे सरकार की बहुत बड़ी सोच है।

दरअसल कूनो नेशनल पार्क में इस समय चीतों की आबादी बहुत ज्यादा हो गई है। वहां अब छोटे-बड़े मिलाकर 26 चीते हो गए हैं। एक ही जंगल में इतने सारे बड़े शिकारी जानवरों को रखना सही नहीं है। अगर किसी वजह से वहां कोई बीमारी फैल गई या कोई प्राकृतिक आपदा आ गई, तो सारे चीते खतरे में आ जाएंगे।

इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही कहा था कि हमें एक नहीं, बल्कि कई चीता घर बनाने होंगे। ताकि अगर एक जगह दिक्कत आए तो दूसरी जगह चीते सुरक्षित रहें। इसी प्लान के तहत दूसरा घर गांधीसागर को चुना गया है।

गांधीसागर क्यों चुना गया? इसके तीन बड़े कारण हैं। पहला कारण है यहां का मैदान। गांधीसागर अभयारण्य 368 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां दूर-दूर तक सिर्फ घास के मैदान हैं। चंबल नदी इसके बीच से गुजरती है। चीते को शिकार करने के लिए खुला मैदान चाहिए, जो यहां भरपूर है।

दूसरा कारण है शिकार। यहां चीतल, सांभर, नीलगाय और खरगोश बहुत ज्यादा संख्या में हैं। मतलब चीते को खाने की कोई कमी नहीं होगी।

तीसरा और सबसे बड़ा कारण है इंसानों से दूरी। गांधीसागर के आसपास बहुत कम गांव हैं। इसलिए चीता और इंसान का झगड़ा नहीं होगा।

गांधीसागर के चार चीतों की पूरी लिस्ट

गांधीसागर में CCB2 का इंतजार तीन चीते कर रहे हैं। ये तीनों पहले से ही वहां के जंगल को अपना घर बना चुके हैं।

1.  प्रभाष: ये एक नर चीता है। ये दक्षिण अफ्रीका से आया था। इसकी उम्र 4 साल है। ये बहुत ताकतवर है और सबसे तेज दौड़ता है।

2.  पावक: ये भी नर चीता है। इसका नाम पावक इसलिए रखा गया क्योंकि ये आग की तरह तेज दौड़ता है। ये नामीबिया से आया था।

3.  धीरा: ये मादा चीता है। इसका जन्म भारत में ही कूनो में हुआ था। इसलिए ये भारतीय मौसम की आदी है। इसका स्वभाव बहुत शांत है।

4.  CCB2: ये नई मेहमान है। ये बोत्सवाना से आई है और अब गांधीसागर में रहेगी।

अब दो नर और दो मादा का जोड़ा बनने से यहां प्रजनन बहुत आसान हो जाएगा। वन विभाग को उम्मीद है कि अगले साल तक यहां 4 से 5 नन्हे शावकों का जन्म होगा।

प्रधानमंत्री मोदी का सपना और मुख्यमंत्री मोहन यादव की मेहनत

आपको थोड़ा इतिहास बताता हूं। साल 1952 में भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा था कि भारत में चीते खत्म हो चुके हैं। आखिरी चीता 1947 में छत्तीसगढ़ के कोरिया रियासत में शिकार के दौरान मारा गया था। उसके बाद 70 साल तक हमारे जंगल चीते की आवाज के बिना सूने पड़े रहे।

फिर 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर एक ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने नामीबिया से 8 चीते मंगाए और अपने हाथों से कूनो में उनका पिंजरा खोला। वो तस्वीर आज भी हर भारतीय के दिल में है।

लेकिन चीतों को लाना आसान था, उन्हें बचाना मुश्किल था। यहां पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Bata. मोहन यादव की भूमिका शुरू होती है। डॉ. मोहन यादव ने इस प्रोजेक्ट को अपना मिशन बना लिया। उन्होंने वन विभाग को कहा कि पैसों की चिंता मत करो, बस चीते सुरक्षित रहने चाहिए।

उन्होंने चीतों के लिए 24 घंटे डॉक्टरों drew की टीम तैनात की। हर चीते के गले में सैटेलाइट कॉलर लगाया गया ताकि उसकी लोकेशन पता चलती रहे। गांव-गांव में चीता मित्र बनाए गए, जिनका काम है चीतों पर नजर रखना। आज इसी मेहनत का नतीजा है कि कूनो में चीतों की संख्या 8 से बढ़कर 26 हो गई है और अब गांधीसागर में भी दूसरा घर बस रहा है।

इस प्रोजेक्ट से आम आदमी को क्या फायदा?

देखिए, ये प्रोजेक्ट सिर्फ जानवरों के लिए नहीं है, ये इंसानों के लिए भी है। जब कूनो में चीते आए तो श्योपुर जैसे छोटे से जिले की किस्मत बदल गई। वहां पहले कोई टूरिस्ट नहीं जाता था, आज वहां हर महीने 10 हजार से ज्यादा टूरिस्ट आ रहे हैं।

वहां के लोकल लड़के जो पहले 300 रुपये की मजदूरी करते थे, आज जिप्सी चलाकर महीने के 30 से 40 हजार रुपये कमा रहे हैं। महिलाओं ने अपने घरों में होम स्टे खोल लिए हैं। होटल बन रहे हैं, दुकानें खुल रही हैं।

अब वही कहानी मंदसौर और नीमच में भी होने वाली है। गांधीसागर के किनारे सरकार टेंट सिटी बनाने जा रही है। वहां भी लोकल युवाओं को रोजगार मिलेगा।

दूसरा फायदा किसानों को होगा। चीता आने से नीलगाय और जंगली सूअर की संख्या कंट्रोल में रहेगी, जो हर साल हजारों एकड़ फसल बर्बाद कर देते हैं। इससे किसानों का भी फायदा होगा और पर्यावरण का संतुलन भी बना रहेगा।

आप गांधीसागर कैसे जा सकते हैं?

अगर आप भी चीतों को देखना चाहते हैं तो आपको अभी 3-4 महीने इंतजार करना पड़ेगा। CCB2 को छोड़ने के बाद उसे नए जंगल में सेट होने में थोड़ा समय लगेगा। उसके बाद सरकार वहां सफारी शुरू करेगी।

गांधीसागर मंदसौर से 80 किलोमीटर दूर है। आप इंदौर से बस या ट्रेन से मंदसौर आ सकते हैं। मंदसौर से आपको टैक्सी मिल जाएगी। रहने के लिए मध्यप्रदेश टूरिज्म का रिसॉर्ट है, जहां एक दिन का खर्चा 2000 से 2500 रुपये है। खाने-पीने की भी अच्छी व्यवस्था है।

कुल मिलाकर रविवार का दिन मध्यप्रदेश के लिए बहुत बड़ा दिन होने वाला है। जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव CCB2 को आजाद करेंगे, तो वो सिर्फ एक जानवर को आजाद नहीं करेंगे, बल्कि भारत के 70 साल पुराने एक अधूरे सपने को पूरा करेंगे।

मध्य प्रदेश से राजकुमार प्रजापति की खास रिपोर्ट।

हमारी टीम का विशेष आभार

संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)




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