मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान: छतरपुर शिविर में प्रशासन ने जीता जनता का दिल, 146 हितग्राही मौके पर लाभान्वित।
By - ब्यूरो रिपोर्ट, पन्ना | 01 नवम्बर 2026 | Chhattarpur MP
MP News: छतरपुर जिले में शासन और जनता के बीच की दूरी को पाटने का एक सशक्त उदाहरण देखने को मिला। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत नगरपालिका परिषद छतरपुर में आयोजित विशेष जन-कल्याण शिविर में न सिर्फ कागजों पर बल्कि जमीन पर भी लोगों को राहत मिली। इस शिविर में कुल 146 हितग्राहियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मौके पर दिया गया, जबकि 608 आवेदनों पर सुनवाई कर 503 का तत्काल निराकरण किया गया। सबसे खास पल तब रहा जब स्वामित्व योजना के तहत 13 गरीब परिवारों को उनकी जमीन की रजिस्ट्री विधायक और कमिश्नर ने अपने हाथों से सौंपी। रजिस्ट्री हाथ में आते ही कई बुजुर्गों की आंखें नम हो गईं और चेहरे पर सालों बाद सुकून की मुस्कान लौट आई।
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान क्या है और क्यों है जरूरी?
मध्यप्रदेश सरकार ने इस अभियान की शुरुआत इसी सोच के साथ की थी कि सरकार दफ्तरों में नहीं, जनता के बीच होनी चाहिए। अक्सर होता यह है कि योजनाएं तो बहुत बनती हैं, लेकिन जानकारी के अभाव, दलालों के चक्कर और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने के डर से जरूरतमंद व्यक्ति उन तक पहुंच ही नहीं पाता।
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान इसी विश्वास को बहाल करने का प्रयास है। इसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं। पहला - लोगों की समस्याओं को उनके घर के पास सुनना। दूसरा - प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध और पारदर्शी निराकरण करना। तीसरा - पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ उसी दिन, उसी मंच से देना। छतरपुर में लगा यह शिविर इसी उद्देश्य की सफलता की कहानी है।
नगरपालिका प्रांगण में भव्य शुभारंभ, प्रशासनिक अमला रहा मौजूद
शुक्रवार को नगरपालिका परिषद छतरपुर के प्रांगण में सुबह से ही चहल-पहल शुरू हो गई थी। दूर-दराज के गांवों से लोग अपने आवेदन लेकर पहुंचे थे। शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। शुभारंभ छतरपुर विधानसभा की विधायक श्रीमती ललिता यादव, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती ज्योति चौरसिया और सागर संभाग के कमिश्नर श्री दिलीप कुमार ने किया।
मंच पर जिले का पूरा प्रशासनिक नेतृत्व मौजूद था। कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने पूरे शिविर की व्यवस्था की निगरानी की, पुलिस अधीक्षक श्री रजत सकलेचा सुरक्षा और कानून व्यवस्था संभाले हुए थे, जिला पंचायत सीईओ श्री नमः शिवाय अरजरिया सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी अपने-अपने काउंटरों पर मौजूद थे। इतने बड़े स्तर पर अधिकारियों की मौजूदगी ने लोगों में यह भरोसा जगाया कि आज उनकी बात जरूर सुनी जाएगी।
विधायक ललिता यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुंचे। कमिश्नर दिलीप कुमार ने कहा कि जन विश्वास ही सुशासन की नींव है और ऐसे शिविरों से प्रशासन और जनता के बीच की खाई कम होती है।
608 आवेदन, 503 का निराकरण - कैसे हुआ इतना तेज समाधान?
इस शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी कार्यक्षमता रही। प्री-कैंप में प्राप्त आवेदनों और शिविर के दिन आए आवेदनों को मिलाकर कुल 608 आवेदनों पर सुनवाई हुई। इसमें से 503 आवेदनों का अधिकारियों ने मौके पर ही निराकरण कर दिया। यह लगभग 83 प्रतिशत निराकरण दर है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए पहले से ही तैयारी की गई थी। हर विभाग का अलग काउंटर बनाया गया था। राजस्व विभाग के पास जमीन के नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के मामले आए। महिला एवं बाल विकास विभाग के पास लाड़ली लक्ष्मी और लाड़ली बहना से जुड़े आवेदन थे। नगरपालिका के काउंटर पर पेंशन, जन्म प्रमाण पत्र और आवास योजना के आवेदन अधिक थे।
कलेक्टर मृणाल मीना स्वयं हर काउंटर पर जाकर समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जो आवेदन आज किसी दस्तावेज की कमी से नहीं हो पा रहे हैं, उन्हें सूचीबद्ध कर लिया जाए और अगले 7 दिनों में संबंधित पटवारी या सचिव उनके घर जाकर दस्तावेज पूरे करवाकर निराकरण करें। इस पारदर्शी प्रक्रिया से लोगों में काफी संतोष देखा गया।
146 हितग्राहियों को मिला विभिन्न योजनाओं का लाभ - एक-एक योजना का महत्व
शिविर में विभिन्न योजनाओं के 146 हितग्राहियों को मौके पर लाभान्वित किया गया। यह आंकड़ा नहीं, बल्कि 146 परिवारों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव है।
मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के 6 हितग्राही: यह योजना मध्यप्रदेश सरकार की सबसे सफल योजनाओं में से एक है। इसमें बेटी के जन्म पर 1.18 लाख रुपये का आश्वासन प्रमाण पत्र दिया जाता है। बेटी के 6वीं, 9वीं, 11वीं और 12वीं में प्रवेश पर छात्रवृत्ति और 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर 1 लाख रुपये की अंतिम राशि दी जाती है। शिविर में 6 बच्चियों को इस योजना से जोड़ा गया, जिससे उनके माता-पिता के चेहरे पर बेटी के सुरक्षित भविष्य की चमक देखी गई।
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के 3 हितग्राही: महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये की आर्थिक सहायता देने वाली इस योजना ने प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। शिविर में 3 नई महिलाओं को इस योजना में जोड़ा गया।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के 2 हितग्राही: पहले बच्चे के जन्म पर गर्भवती महिलाओं को 5000 रुपये की सहायता देने वाली इस योजना के तहत 2 महिलाओं को लाभ दिया गया, ताकि वे गर्भावस्था के दौरान अपना और बच्चे का पोषण अच्छे से कर सकें।
प्रधानमंत्री आवास योजना के 13 हितग्राही: हर गरीब को पक्का मकान देने के सपने को पूरा करने वाली इस योजना में शहरी क्षेत्र के 7 और ग्रामीण क्षेत्र के 6 हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र दिए गए। कई लोगों को तो बरसों से अपने आवास की दूसरी किस्त का इंतजार था, जो इस शिविर में पूरा हुआ।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 50 हितग्राही: इस शिविर में सबसे ज्यादा लाभ इसी योजना में मिला। 50 बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को 600 रुपये मासिक पेंशन की स्वीकृति मिली। एक 70 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि अब उन्हें अपनी दवाइयों के लिए बेटे के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।
पीएम स्वनिधि और श्रम कार्ड: 6 मेहनतकश मजदूरों को श्रम कार्ड मिले, जिससे वे श्रम विभाग की 16 से अधिक योजनाओं के पात्र बन गए। वहीं 12 छोटे फुटपाथ व्यवसायियों और ठेले वालों को पीएम स्वनिधि योजना के तहत 10-10 हजार रुपये के ब्याज मुक्त ऋण के प्रमाण पत्र दिए गए।
शिक्षा और कृषि: 8 बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र मिला, जो स्कूल में एडमिशन के लिए जरूरी था। 6 नवविवाहित जोड़ों को विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र मिला। 2 मेधावी छात्रों को लैपटॉप के लिए 25-25 हजार रुपये के चेक दिए गए। कृषि विभाग ने 25 किसानों को उन्नत किस्म के बीजों के प्रमाण पत्र बांटे।
स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री: 13 परिवारों को मिला जमीन का मालिकाना हक
शिविर का सबसे भावुक क्षण स्वामित्व योजना के वितरण का था। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत गांव की आबादी की जमीन पर वर्षों से काबिज लोगों को ड्रोन सर्वे कर कानूनी मालिकाना हक दिया जाता है।
छतरपुर में 13 ऐसे परिवारों को, जो 20-30 साल से अपनी जमीन पर रह रहे थे लेकिन उनके पास कोई कागज नहीं था, उन्हें विधायक ललिता यादव और कमिश्नर दिलीप कुमार ने रजिस्ट्री सौंपी। रजिस्ट्री मिलते ही एक महिला की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा, "आज तक लोग कहते थे कि यह सरकारी जमीन है, कभी भी हटा देंगे। आज पहली बार लगा कि यह जमीन हमारी है। अब हम इस पर बैंक से लोन लेकर अपने बच्चों के लिए पक्का घर बना सकेंगे।"
स्वामित्व योजना से न सिर्फ संपत्ति विवाद खत्म होते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है क्योंकि इस प्रॉपर्टी कार्ड पर बैंक आसानी से लोन दे देता है।
उद्यमी संवाद: उद्योगों की बिजली समस्या का मौके पर समाधान
शिविर के दूसरे सत्र में कमिश्नर सागर ने जिले के उद्यमियों के साथ सीधा संवाद किया। यह एक नई पहल थी जहां उद्योगपति अपनी समस्या सीधे कमिश्नर के सामने रख सके।
उद्यमियों ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र चंदला में बिजली के लोड की भारी समस्या है। लो वोल्टेज और बार-बार बिजली जाने से उनकी महंगी मशीनें खराब हो रही हैं और उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर दिलीप कुमार ने तुरंत मंच से ही अधीक्षण यंत्री, एमपीईबी को कॉल किया और 48 घंटे के भीतर समस्या का स्थायी समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि छतरपुर में ग्रेनाइट की अपार संभावनाएं हैं, इसलिए यहां ग्रेनाइट कटिंग और पॉलिशिंग का एक विशेष क्लस्टर विकसित किया जाए। इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश जिला उद्योग केंद्र को दिए गए। इस फैसले से स्थानीय उद्यमियों में खुशी की लहर है क्योंकि इससे उन्हें अपना माल बाहर भेजने की बजाय यहीं प्रोसेस करने की सुविधा मिलेगी।
निष्कर्ष: विश्वास से ही बनता है विकास
कुल मिलाकर छतरपुर में आयोजित मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान का यह शिविर एक सफल मॉडल साबित हुआ। इसने साबित कर दिया कि अगर प्रशासन ठान ले तो 600 से अधिक आवेदनों का निराकरण एक दिन में भी किया जा सकता है। 146 परिवारों को मौके पर लाभ देकर प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि सरकार उनके साथ है।
ऐसे शिविर न केवल योजनाओं का लाभ पहुंचाते हैं, बल्कि जनता के मन में सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास को भी मजबूत करते हैं। यही विश्वास अंततः विकास की नींव बनता है।
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: अजयगढ़, पन्ना से राजकुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट।
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)



