सागर कमिश्नर की बैठक: बिजली, जल और CM हेल्पलाइन पर सख्त निर्देश
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| Sagar sambhag Commissioner Dilip Kumar bijli marmmat aur CM helpline shikayaton ke nirakaran ke nirdesh dete hue |
बिजली मरम्मत में देरी बर्दाश्त नहीं: सागर कमिश्नर दिलीप कुमार ने दिए सख्त निर्देश, CM हेल्पलाइन के 100 दिन पुराने केस गुरुवार तक निपटाने का अल्टीमेटम
Sagar News: हमारे संवाद दाता ने बताया की मध्यप्रदेश के सागर संभाग में आम जनता से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासन अब सख्त मोड में आ गया है। सागर संभाग के कमिश्नर श्री दिलीप कुमार ने गुरुवार को अपने कार्यालय में एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें चार सबसे महत्वपूर्ण विभागों - ऊर्जा विभाग (बिजली कंपनी), लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE), जल संसाधन विभाग और मध्यप्रदेश जल निगम के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में कमिश्नर ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए और यदि कहीं भी समस्या है तो उसका निराकरण समय-सीमा के भीतर होना चाहिए। इस बैठक में संयुक्त आयुक्त (विकास) श्री पीसी शर्मा सहित संभाग के सभी छह जिलों - सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
ऊर्जा विभाग की समीक्षा: ट्रांसफार्मर और वोल्टेज समस्या पर फोकस
बैठक की शुरुआत ऊर्जा विभाग की समीक्षा से हुई। कमिश्नर श्री कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता तो पर्याप्त है, लेकिन वितरण और मेंटेनेंस की व्यवस्था में कई जगह खामियां देखने को मिल रही हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में यह शिकायत आम है कि ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद कई दिनों तक बदला नहीं जाता।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग और रिप्लेसमेंट के लिए एक Standard Operating Procedure (SOP) बनाया जाए। शहरी क्षेत्र में यदि कोई ट्रांसफार्मर फेल होता है तो उसे 24 घंटे के भीतर और ग्रामीण क्षेत्र में 48 घंटे के भीतर हर हाल में बदल दिया जाए। इसके लिए पहले से ही अतिरिक्त ट्रांसफार्मरों का स्टॉक जिला स्तर पर रखा जाए।
इसके अलावा वोल्टेज की समस्या को लेकर भी कमिश्नर ने चिंता जताई। सागर संभाग के कई ग्रामीण इलाकों में, विशेषकर दमोह और पन्ना जिले के अंदरूनी गांवों में लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है, जिससे किसानों के मोटर पंप नहीं चल पाते और घरों में उपकरण खराब हो जाते हैं। कमिश्नर ने कहा कि ऐसे फीडरों को चिन्हित किया जाए और वहां कैपेसिटर बैंक लगाए जाएं या अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाकर लोड को विभाजित किया जाए।
किसानों के मुद्दे पर उन्होंने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस समय मध्यप्रदेश में रबी सीजन की बुवाई की तैयारी चल रही है। गेहूं, चना और सरसों की फसल के लिए किसानों को सिंचाई की आवश्यकता है। यदि समय पर बिजली नहीं मिलेगी तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। इसलिए कृषि फीडरों पर 10 घंटे बिजली आपूर्ति का जो शेड्यूल तय है, उसका कड़ाई से पालन किया जाए और रात के समय में भी पर्याप्त वोल्टेज के साथ बिजली दी जाए।
वसूली को लेकर भी उन्होंने निर्देश दिए। कमिश्नर ने कहा कि कई जगहों पर बिजली बिल की वसूली का प्रतिशत काफी कम है। वसूली बढ़ने से विभाग की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और वह मेंटेनेंस पर ज्यादा खर्च कर सकेगा। हालांकि, वसूली के दौरान आम उपभोक्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।
सीएम हेल्पलाइन 181: सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक का सबसे अहम एजेंडा सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का था। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में सीएम हेल्पलाइन 181 मुख्यमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। इस पर आने वाली हर शिकायत की मॉनिटरिंग सीधे भोपाल स्थित सीएम हाउस से होती है। इसकी रैंकिंग से कलेक्टर से लेकर कमिश्नर तक की परफॉर्मेंस तय होती है।
कमिश्नर श्री कुमार ने अधिकारियों को जानकारी दी कि शुक्रवार को मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन द्वारा पूरे प्रदेश की सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की समीक्षा की जाएगी। इसलिए सागर संभाग में कोई भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि जो भी शिकायतें 100 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं, उनका निराकरण गुरुवार शाम तक अनिवार्य रूप से कर लिया जाए।
आंकड़ों के अनुसार, सागर संभाग में सबसे ज्यादा शिकायतें बिजली, हैंडपंप, नल-जल योजना और राजस्व से जुड़ी होती हैं। कई बार शिकायतें सिर्फ छोटे से तकनीकी कारण से लंबित रह जाती हैं, जैसे कि किसी गांव में नल-जल योजना का मोटर जल गया है और उसे बदलने के लिए फाइल बिजली विभाग और पीएचई विभाग के बीच घूम रही है। कमिश्नर ने कहा कि ऐसी अंतर-विभागीय समस्याओं को आपसी समन्वय से तुरंत हल किया जाए। जनता को विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत का निराकरण सिर्फ कागजों पर नहीं होना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर होना चाहिए। कई बार अधिकारी शिकायत को बिना मौके पर गए ही बंद कर देते हैं, जिससे आवेदक फिर से शिकायत करता है और संतुष्टि का प्रतिशत गिर जाता है। इसलिए हर शिकायतकर्ता से बात करके उसकी संतुष्टि लेना जरूरी है।
जल जीवन मिशन और नल-जल योजनाओं की स्थिति
मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सागर संभाग में भी हजारों गांवों में इस योजना पर काम चल रहा है। कमिश्नर ने जल निगम और पीएचई विभाग के अधिकारियों से कहा कि ऐसी कोई भी नल-जल योजना बंद नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई जगहों पर यह देखने में आया है कि योजना बनकर तैयार है, पाइपलाइन बिछ गई है, टंकी बन गई है, लेकिन बिजली कनेक्शन न मिलने के कारण मोटर चालू नहीं हो पा रहा है। यह बेहद गंभीर लापरवाही है। ऊर्जा विभाग और जल निगम के अधिकारी आपस में बैठकर ऐसी सभी योजनाओं की सूची बनाएं और एक सप्ताह के भीतर सभी को बिजली कनेक्शन देकर चालू कराएं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जहां-जहां निर्माण कार्य पूरा हो गया है, वहां पानी की सप्लाई शुरू करने से पहले प्रेशर टेस्टिंग और वाटर क्वालिटी टेस्टिंग पूरी कर ली जाए। कई बार जल्दबाजी में सप्लाई शुरू कर दी जाती है और बाद में पाइपलाइन लीकेज या गंदे पानी की शिकायत आती है, जिससे पूरी योजना बदनाम हो जाती है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग: हैंडपंप हैं जीवन रेखा
शहरी क्षेत्रों में तो नल से पानी आता है, लेकिन आज भी सागर संभाग के हजारों गांवों में हैंडपंप ही पेयजल का मुख्य स्रोत हैं। गर्मियों में जब नल-जल योजना में पानी कम हो जाता है तो हैंडपंप ही लोगों का सहारा बनते हैं।
कमिश्नर ने पीएचई विभाग को निर्देश दिए कि हैंडपंप संधारण की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। अक्सर शिकायत मिलती है कि हैंडपंप खराब होने की सूचना देने के कई दिन बाद भी मैकेनिक नहीं आता। इसके लिए उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकासखंड में पर्याप्त संख्या में हैंडपंप मैकेनिक नियुक्त किए जाएं और उनकी सूची, मोबाइल नंबर सहित प्रत्येक ग्राम पंचायत के पंचायत भवन, स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र पर चस्पा की जाए। ताकि ग्रामीण सीधे मैकेनिक को फोन कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि हैंडपंप के पार्ट्स, जैसे कि वाशर, पाइप, हत्था आदि का पर्याप्त स्टॉक ब्लॉक स्तर पर रखा जाए, ताकि मरम्मत के लिए सामान की कमी न हो।
जल संसाधन विभाग: सिंचाई का रकबा बढ़ाना है लक्ष्य
सागर संभाग बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है, जहां सिंचाई सुविधाओं की हमेशा से कमी रही है। यहां के किसान आज भी मानसून पर निर्भर हैं। कमिश्नर ने जल संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि संभाग में सिंचाई का रकबा बढ़ाना उनकी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि कई मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं। इनके पूरा होने से हजारों हेक्टेयर जमीन में सिंचाई की सुविधा मिल सकती है। लेकिन ये परियोजनाएं वन विभाग की एनओसी न मिलने या भू-अर्जन की प्रक्रिया में उलझी हुई हैं। कमिश्नर ने इन सभी परियोजनाओं की अलग-अलग फाइल बनाकर वन विभाग से समन्वय करने और भू-अर्जन के लिए राजस्व विभाग के साथ बैठक करने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि बांधों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का एक पारदर्शी और व्यवस्थित प्लान बनाया जाए। इसके लिए किसानों, जनप्रतिनिधियों और जल उपभोक्ता संस्थाओं के साथ बैठक की जाए। पानी की चोरी रोकने और टेल-एंड तक पानी पहुंचाने के लिए भी विशेष निगरानी की जाए।
बैठक का निष्कर्ष और जनता पर असर
कुल मिलाकर देखें तो कमिश्नर श्री दिलीप कुमार की यह समीक्षा बैठक आम जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इन निर्देशों का पालन सही तरीके से होता है तो आने वाले दिनों में सागर संभाग के लोगों को बिजली कटौती, लो वोल्टेज, पेयजल की कमी और सिंचाई के पानी की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
विशेष रूप से सीएम हेल्पलाइन की 100 दिन पुरानी शिकायतों का निपटारा होने से उन सैकड़ों लोगों को न्याय मिलेगा जो महीनों से अपनी समस्या लेकर भटक रहे हैं। अब देखना यह होगा कि अधिकारी गुरुवार तक कितनी शिकायतों का निराकरण कर पाते हैं और शुक्रवार को मुख्य सचिव की समीक्षा में सागर संभाग की रैंकिंग में कितना सुधार होता है।
FAQ
Q1. सागर संभाग में कितने जिले आते हैं?
उत्तर: सागर संभाग में 6 जिले आते हैं - सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर।
Q2. सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत कैसे करें?
उत्तर: आप 181 पर कॉल करके या http://mp.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। बिजली, पानी, सड़क, राशन से जुड़ी किसी भी समस्या की शिकायत यहां की जा सकती है।
Q3. बिजली की शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर क्या है?
उत्तर: मध्यप्रदेश में बिजली की शिकायत के लिए 1912 टोल फ्री नंबर है। इसके अलावा आप 181 पर भी शिकायत कर सकते हैं।
हमारी टीम का विशेष आभार
संवाददाता: सागर से रामबाबू पटेल
लेखक / संपादक: राजेश कुमार पटेल (पन्ना, मध्य प्रदेश)
प्रकाशक: आपका न्यूज़ स्टार (पन्ना, मध्य प्रदेश)


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